भविष्य में भगदड़ न हो, इसके लिए कोई समाधान ईजाद करना हमारा अगला चरण था। अपने अध्ययन में हमने पाया कि कुंभ जैसे विशाल आयोजन में भीड़ का अनुमान न लगा पाना दुर्घटना का एक बड़ा कारक है। शोध का एक पहलू यह भी रहा कि हमें पूर्व के आयोजनों से यह मालूम हो गया कि कहां ज्यादा भीड़ इकट्ठा होती है और कहां कम।
इसका हासिल यह हुआ कि हम प्रशासन को बताने में सक्षम हुए कि किस जगह की भीड़ नियंत्रित करने की आवश्यकता ज्यादा है। इसके अलावा लोगों की सही गिनती कर पाना भी प्रशासन के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। और इसी बात को ध्यान में रखकर मैंने अपना दिमाग चलाना शुरू किया। अपने साथियों की मदद से मैंने बहुत जल्द एक 'क्राउड काउंटिंग मैट' (चटाई) बनाई, जो पदचिन्हों के आधार पर लोगों की गिनती कर पाने में सक्षम थी। तकनीक की वजह से इसे बनाने में बहुत खर्च भी नहीं आया।
हमने ट्रायल के लिए इसका इस्तेमाल एक स्थानीय मंदिर में किया। इस अनूठी चटाई (आशियोटो) के सफल प्रयोग के बाद स्थानीय प्राधिकरणों से जुड़े अधिकारी गोदावरी नदी में होने वाले शाही स्नान के दौरान इसका उपयोग करने के लिए सहमत हो गए। ब्लूटूथ संचार तकनीक से संचालित होने वाली यह चटाई अपने मकसद पर बिल्कुल खरी उतरी। मैंने अपनी टीम के साथ मिलकर एक ऐप भी विकसित किया, जिसकी मदद से अधिकारियों को भीड़ का रियल टाइम डाटा मिलता रहे। यह मैट किसी भी बड़े आयोजन में काम आ सकती है। मेरे अब तक के सफर ने मुझे काफी कुछ सिखा दिया है। मैं उम्मीद करता हूं कि आगे भी मैं समाज के काम आता रहूंगा।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।