मैंने सबसे पहले उन लोगों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयास की शुरुआत सरकारी स्कूलों से की। गांव में रोजगार न होने से युवा शहरों की ओर पलायन कर जाते थे। इसे रोकने व रोजगार मुहैया करवाने के लिए ऐसी आईटी कंपनी खोली, जिसे आदिवासी युवा स्वयं ही संचालित करते हैं। मैंने अभेद्य नाम का एक संगठन भी बनाया है, जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों का जीवन स्तर सुधारना है।
इसके जरिये मैं आदिवासियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ रहा हूं। इसके माध्यम से स्कूल भी संचालित किए जा रहे हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए बाहर के शिक्षकों को नियुक्त किया है। कुछ सहयोगियों ने इस स्कूल में बच्चों के लिए फर्नीचर, बैग, जूते, स्वेटर, कॉपी-किताबें मुहैया करवाई हैं। स्कूल में बच्चों को बेसिक तकनीकी ज्ञान के लिए कंप्यूटर लैब की भी व्यवस्था करवाई। ये बच्चे और युवा मुझसे ज्यादा अनुभवी हैं, मैं हर दिन इनसे सीखता हूं।
ये लोग सिर्फ विज्ञान और तकनीक से पीछे हैं, जिस पर हम ध्यान दे रहे हैं। जनसहयोग से बनी इस कंपनी का नाम 'विलेज क्वेस्ट' रखा गया है। इस कंपनी के माध्यम से बेसिक कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र खोला गया है, जहां पर न केवल प्रशिक्षण दिया जाता है, बल्कि डेटा एंट्री जैसे काम दिलाकर रोजगार भी मुहैया कराया जा रहा है। यहां बच्चों को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, पेंटिंग, टाइपिंग जैसी कई चीजें सिखाई जाती हैं।
पानी की कमी को दूर करने के लिए मैं इस गांव में जल संरक्षण की योजना पर भी काम कर रहा हूं। सरकारी योजनाओं का लाभ इन लोगों तक पहुंचाने के लिए वहां पर युवाओं और गांव के वरिष्ठ लोगों को इकट्ठा कर एक समिति बनाई है। युवा योजनाओं की जानकारी लेकर वरिष्ठ लोगों तक पहुंचते हैं, जिसके बाद उनका लाभ गांव के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाया जाता है। गांव में काम करना मेरा शौक है, गांव और शहर के बीच का अंतर हमें खत्म करना है। हमारे कुछ मित्र और संस्थाएं इस काम में हमारी मदद करती हैं।
(विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।)