अब मेरा सामाजिक दायरा बढ़ चुका था और अपने नेतृत्व कौशल के दम पर मैंने खुद के तीन समूह शुरू कर दिए। जिस संस्थान के लिए मैं काम करती थी, उसे मेरी काबिलियत का अंदाजा हुआ। नतीजतन मुझे संस्था के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मुखिया बना दिया गया। और अगले कुछ समय तक मेरा काम-धाम ऐसे ही चलता रहा।
मेरी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब एक फेडरेशन में मुझे सचिव बनाया गया। अपनी योग्यता के दम पर बहुत जल्द ही मैंने फेडरेशन की कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कराई। फेडरेशन का कार्य क्षेत्र सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि गुजरात और तमिलनाडु तक फैला था। मैंने एक साथ कई राज्यों की महिलाओं के साथ काम किया। चंद वर्षों तक काम करने के बाद मेरा आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। कभी बस रुकवाते हुए झिझकने वाली महिला हर दिन हजारों महिलाओं की समस्याओं का समाधान निकालने में जुटी रहती! मेरे काम के बारे में दूसरे लोगों को जानकारी हुई, तो कई जगह से मुझे आमंत्रण मिले।
लोग स्वयं सहायता समूह, विशेषकर महिला सशक्तीकरण के मामले में मेरी सफलता से प्रभावित थे और मेरी कार्यप्रणाली के बारे में जानना चाहते थे। काम करने का मेरा तरीका बहुत साफ है, जैसे यदि कोई महिला किसान अपनी गाय के लिए चारा खरीदना चाहती है, तो कोई भी बैंक इस काम के लिए उसे कर्ज नहीं देगा। ऐसे ही यदि किसी के पास जमीन नहीं है, तो वहां भी बैंक वाले हाथ खड़े कर लेते हैं। हमारा काम यहीं से शुरू होता है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।