फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किस्मत से लड़कर 7वीं पास महिला ने रचा इतिहास, स्टार्टअप को न्यूयॉर्क में मिला पुरस्कार

Tue, 24 Jul 2018 01:28 PM IST
गोदावरी डांगे
विज्ञापन
गोदावरी डांगे
विज्ञापन

पंद्रह साल पहले मुझे अमरावती में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करनी थी। मुझे अमरावती के नाम को लेकर कुछ गलतफहमी थी और मैंने घर में अपनी बहन से कहा कि मैं अमेरिका जा रही हूं। मेरी बहन ने हंसते हुए मुझे अमेरिका और अमरावती का अंतर समझाया। उस दिन मैं सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि मैं कभी अमेरिका भी जाऊंगी। मगर पिछले कुछ वर्षों में मैंने न सिर्फ अमेरिका, बल्कि उसके अलावा सात देशों की यात्रा कर ली है। और यह महिलाओं के लिए काम करने के कारण ही संभव हुआ।

विज्ञापन


पंद्रह बरस की उम्र में मेरी शादी कर दी गई। चार साल ही बीते थे कि मैं विधवा हो गई। कुछ दिनों तक ससुराल में रहने के बाद मैं अपने दोनों बच्चों को लेकर उस्मानाबाद जिले के गंधारा गांव में अपने मायके वापस आ गई। उस वक्त मेरा बड़ा बेटा साढ़े चार साल का और छोटा वाला मुश्किल से एक साल का था। मेरे सामने न सिर्फ अपने अस्तित्व की चुनौती थी, बल्कि मुझे अपने बच्चों के भविष्य की फिक्र भी थी। जल्द शादी होने की वजह से मैं सिर्फ सातवीं कक्षा तक पढ़ सकी थी। कम पढ़ी-लिखी होने के कारण कोई नौकरी हासिल कर पाना भी आसान नहीं था। उस वक्त बस के सामने हाथ हिलाकर उसे रोकना भी मेरे लिए चुनौती था। मुझे यह डर सताता रहता कि यदि मेरे रोकने पर भी बस नहीं रुकी, तो आसपास के लोग मुझ पर हंसेंगे।

साल 2000 की बात होगी, जब पहली बार मेरी मां ने मेरा परिचय एक स्वयं सहायता समूह से कराया। शुरुआत में मैं उस समूह की बैठकों में बस चुपचाप बैठी रहती। धीरे-धीरे समूह की गतिविधियों में मेरी दिलचस्पी बढ़ती गई। कुछ तो दूसरों की सलाह, तो कुछ अपने बढ़े आत्मविश्वास के दम पर मैंने जल्द ही स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और आजीविका जैसे कई विषयों में विशेषज्ञता हासिल कर ली।

विज्ञापन
विज्ञापन

अब मेरा सामाजिक दायरा बढ़ चुका था और अपने नेतृत्व कौशल के दम पर मैंने खुद के तीन समूह शुरू कर दिए। जिस संस्थान के लिए मैं काम करती थी, उसे मेरी काबिलियत का अंदाजा हुआ। नतीजतन मुझे संस्था के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मुखिया बना दिया गया। और अगले कुछ समय तक मेरा काम-धाम ऐसे ही चलता रहा।

मेरी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब एक फेडरेशन में मुझे सचिव बनाया गया। अपनी योग्यता के दम पर बहुत जल्द ही मैंने फेडरेशन की कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कराई। फेडरेशन का कार्य क्षेत्र सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि गुजरात और तमिलनाडु तक फैला था। मैंने एक साथ कई राज्यों की महिलाओं के साथ काम किया। चंद वर्षों तक काम करने के बाद मेरा आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। कभी बस रुकवाते हुए झिझकने वाली महिला हर दिन हजारों महिलाओं की समस्याओं का समाधान निकालने में जुटी रहती! मेरे काम के बारे में दूसरे लोगों को जानकारी हुई, तो कई जगह से मुझे आमंत्रण मिले।

लोग स्वयं सहायता समूह, विशेषकर महिला सशक्तीकरण के मामले में मेरी सफलता से प्रभावित थे और मेरी कार्यप्रणाली के बारे में जानना चाहते थे। काम करने का मेरा तरीका बहुत साफ है, जैसे यदि कोई महिला किसान अपनी गाय के लिए चारा खरीदना चाहती है, तो कोई भी बैंक इस काम के लिए उसे कर्ज नहीं देगा। ऐसे ही यदि किसी के पास जमीन नहीं है, तो वहां भी बैंक वाले हाथ खड़े कर लेते हैं। हमारा काम यहीं से शुरू होता है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें