अगर हौंसला हो तो हर लक्ष्य प्राप्त हो सकता है और इसी बात का प्रमाण दिया है कि बंगलूरू की ने। 17 साल की शालिनी कई घरों में झाड़ू, पोछा और बर्तन साफ करने का काम करती है। इसके बावजूद उसने प्री विश्वविद्यालय कोर्सेस परीक्षा में 85 % अंक प्राप्त किए हैं। पढ़ाई में रुचि होने के बावजूद उसने घरों में काम करने को लेकर कभी शिकायत नहीं की क्योंकि उसका परिवार ही उसके लिए सब कुछ है जिसका पेट भरने के लिए वह ये काम करती है।
शालिनी ने पहली से सातवी कक्षा तक की पढ़ाई तमिल माध्यम से की जिसके बाद 10वीं तक की पढ़ाई के लिए उसका तबादला कन्नड़ माध्यम में हो गया। प्री विश्वविद्यालय की पढ़ाई उसने एसजीपीटीए-दीक्षा कॉलेज अंग्रेजी माध्यम से की। बार बार स्कूल और माध्यम बदलना क्या कम चुनौतीपूर्ण था जो घर में भी उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा।