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'उद्यमिता की प्रवृत्ति मुझे मेरे माता-पिता से मिली'

Sat, 02 Jun 2018 02:43 PM IST
जैरेट कैम्प
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Garrett Camp
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मैं अल्बर्टा, कनाडा में पैदा हुआ। मेरी मां एक कलाकार थीं, जबकि पिता अर्थशास्त्री थे। लेकिन मेरे माता-पिता ने मिलकर बिल्डिंग की डिजाइनिंग का काम शुरू किया। इस तरह उद्यमिता की प्रवृत्ति मुझे मेरे माता-पिता से मिली। मेरा बचपन खेल खेलते और इलेक्ट्रिकल गिटार बजाते हुए बीता।

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मेरी शुरुआती पढ़ाई एक छोटे-से स्कूल में हुई। मैं बचपन में सवाल बहुत पूछता था। लेकिन घर में कंप्यूटर आ जाने के बाद, जो एक अंकल ने हमें उपहार में दिया था, मेरा ध्यान उसी पर केंद्रित हो गया। बड़े होने पर मैंने कैलगरी यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली। यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही मैंने एक कंपनी शुरू करने के बारे में सोचा और अपनी तरह की सोच वाले तीन युवाओं से दोस्ती भी गांठ ली।

हमने कई परियोजनाओं के बारे में सोचा और अंततः एक डिस्कवरी इंजन पर काम शुरू किया, जो उपयोगकर्ताओं की रुचि के अनुरूप वेब कंटेंट खोजता था। इस तरह में स्टंबलअपॉन की शुरुआत हुई। इसकी लोकप्रियता ने सिलिकॉन वैली के दिग्गजों का ध्यान खींचा और टाइम ने इसे 50 बेहतरीन वेबसाइटों में शुमार किया। मैं तब तक यूनिवर्सिटी में ही था। 

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स्टंबलअपॉन के सीईओ के तौर पर काम करते हुए मैंने यातायात के लिए मोबाइल से जुड़े एक कैब सर्विस के बारे में सोचा, जो बाद में उबर के रूप में सामने आया; 2009 में मैं इसका सह-संस्थापक बना। सेनफ्रांसिस्को में कार सेवा की बदतर हालत को देखते हुए मेरे मन में मोबाइल आधारित टैक्सी सर्विस का विचार आया।

उबर की स्थापना सेनफ्रांसिस्को में हुई थी, पर बाद में इसका विस्तार न्यूयॉर्क सिटी, शिकागो और वाशिंगटन डीसी में हुआ, और 2012 में इसकी सेवा दुनिया भर में फैल गई। आज 58 देशों के 300 शहरों में उबर की सेवा है। लेकिन उबर की उपलब्धि भी मुझे कुछ नया कर पाने से नहीं रोक पाई, और 2013 में मैंने एक स्टार्ट-अप कंपनी एक्स्पा की शुरुआत की। मेरे अनुसार, एक उद्यमी को अपनी गलतियों से सीखना चाहिए। ऐसे ही किसी भी उद्यम में सफलता का सूत्र नए विचारों में निहित है।
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