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रोशनी यहां है: सागर गुप्ता ने CA बनने का सपना छोड़ शुरू किया कारोबार, चार साल में बनाई 600 करोड़ रुपये की कंपनी

Mon, 15 Sep 2025 11:44 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क।

सार

ग्वालियर के एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले सागर गुप्ता ने वैश्विक चुनौतियों में भी अवसर ढूंढ निकाला। इसी का परिणाम है कि एक छोटे-से कमरे से शुरू हुआ उनका सफर आज एक्का इलेक्ट्रॉनिक्स के रूप में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में अपनी पहचान दर्ज करा चुका है... वैश्विक चुनौतियों से लड़कर खुद की पहचान बनाने की ये प्रेरक कहानी जानिए
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सागर गुप्ता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / डिजिटल ग्राफिक्स
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विस्तार
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बचपन में जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, एक बच्चा पुराने बल्ब, तार और खराब रेडियो को जोड़-तोड़कर उनमें नई जान डालने की कोशिश करता था। घरवालों के लिए यह सिर्फ कबाड़ से खेलना था, लेकिन उसके लिए यह आने वाले भविष्य की बुनियाद थी। वह पढ़ाई करने के साथ-साथ रात में तरह-तरह के प्रयोग भी करता, कई बार करंट लगता, मगर उस दर्द में भी उसे अपनी मंजिल की झलक साफ दिखाई देती थी। कॉलेज की किताबों और पेशेवर जिंदगी के बारे में न सोचकर उसने कुछ बड़ा करने की ठानी।

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पिता के साथ मिलकर अपनी कंपनी का टर्नओवर 600 करोड़ रुपये तक पहुंचाया
चुनौतियां तमाम थीं, लेकिन उसने उन्हें गले लगाकर 22 साल की उम्र में ही इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कदम रखा और महज चार साल में ही पिता के साथ मिलकर अपनी कंपनी का टर्नओवर 600 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया। यह कहानी है कड़ी मेहनत, मजबूत इरादों और कभी हार न मानने वाले एक्का इलेक्ट्रॉनिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड की नींव रखने वाले सागर गुप्ता की। बेहद सीमित संसाधनों से शुरू हुई सागर गुप्ता की यात्रा आज इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में एक नई पहचान गढ़ चुकी है। उनकी कंपनी न सिर्फ मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा दे रही है, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार और नए सपनों को आधार भी दे रही है। यह कहानी युवाओं के लिए एक मिसाल है कि कैसे जुनून, कड़ी मेहनत और सही सोच से कोई भी व्यक्ति असंभव को संभव बना सकता है।

सीमित संसाधनों में गुजरा बचपन
ग्वालियर, मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले सागर गुप्ता के पिता चंद्र प्रकाश गुप्ता महज 20 साल की उम्र में ही दिल्ली आ गए थे। लगभग 30 वर्ष पहले सागर के पिता ने चांदनी चौक में एक छोट-से कमरे से सेमीकंडक्टर व इलेक्ट्रॉनिक सामानों की खरीद-बिक्री से जुड़ा काम शुरू किया। पिता थोक तथा खुदरा विक्रेताओं तक सामान पहुंचाते थे और मां, माधुरी गुप्ता घर संभालती रहीं।  सागर ने रोहिणी स्थित सचदेवा पब्लिक स्कूल से शुरुआती तालीम हासिल की। 2014 में बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सागर ने डीयू के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम (ऑनर्स) किया। सपना तो चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनने का था, लेकिन सीमित संसाधनों में पले-बढ़े सागर की किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही योजनाएं बना रखी थीं।
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22 साल की उम्र में की शुरुआत
महज 22 वर्ष की उम्र में साल 2018 में सागर गुप्ता ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी एक्का इलेक्ट्रॉनिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड की नींव रखी। पिता के तीन दशकों के ट्रेडिंग अनुभव और मजबूत कारोबारी नेटवर्क से उन्हें शुरुआती सहारा जरूर मिला, लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं था। उनका नया-नया उद्यम उस कठिन दौर से गुजरा, जब पूरी दुनिया आर्थिक और राजनीतिक संकटों की चपेट में थी। वैश्विक मंदी, कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और सेमीकंडक्टर की गंभीर कमी जैसी चुनौतियों ने पूरे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को हिला कर रख दिया था। आपूर्ति शृंखला में भारी अवरोध, वैश्विक बाजार की अस्थिरता व उत्पादन लागत में इजाफा, ये सभी बाधाएं एक साथ उनके सामने खड़ी हो गईं। लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी सागर और उनकी टीम ने हार मानने के बजाय इनका डटकर सामना किया। अपनी दृढ़ता, नवाचार और प्रतिबद्धता के दम पर उन्होंने न केवल कंपनी को संभाले रखा, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया।

छोटे-छोटे कदमों से बनाई वैश्विक पहचान
पिता के अनुभव और अपने युवा जोश के दम पर सागर गुप्ता ने मात्र चार साल के भीतर ही 600 करोड़ रुपये से अधिक का विशाल कारोबार खड़ा कर दिया। आज उनकी कंपनी एक्का इलेक्ट्रॉनिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड 100 से अधिक मशहूर कंपनियों के लिए काम कर रही है और हर महीने एक लाख से ज्यादा टीवी का उत्पादन करती है। यही नहीं, कंपनी कई विदेशी ब्रांड्स के लिए भी एलसीडी और एलईडी जैसे उत्पादों को तैयार करने का काम करती है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है। वर्तमान में सोनीपत स्थित कंपनी के कारखाने में 1,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जहां वाशिंग मशीन, इंडक्शन कुकटॉप, मल्टीमीडिया स्पीकर और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले (आईएफपीडी) का निर्माण होता है। एक्का इलेक्ट्रॉनिक्स (इंडिया) प्रा. लि. ने वित्तीय वर्ष 2024 में राजस्व में 1121.95 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।

युवाओं को सीख

  • सपनों की उड़ान तभी सफल होती है, जब इरादों के पंख मजबूत हों।
  • हरदम सीखने वाले लोग ही दुनिया को बदलने की ताकत रखते हैं।
  • बाधाएं आपका रास्ता नहीं रोक सकतीं, अगर आप खुद बाधा न बनें।
  • जिम्मेदारी उठाना सीखें, क्योंकि यही सफलता की पहली सीढ़ी है।
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