सीबीएसई में टॉप करने का सपना देखने वालों के लिए टॉपर्स दे रहे हैं बड़े काम के टिप्स, तो ये 10 नंबरी फार्मूला अपनाएं, टेंशन लेने की जरूरत ही नहीं।
किसी भी परीक्षा में टॉप करना आसान नहीं होता। एक टॉपर के पीछे उसकी कड़ी मेहनत, एकाग्रता और अभिभावकों व टीचर्स का सहयोग और त्याग सब होता है। इन सबकी बदौलत ही अच्छे नंबर मिलते हैं। इन नंबरों से ही बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उनके आगे के सफर की दिशा तय होती है। रविवार को ट्राइसिटी के सीबीएसई दसवीं और बारहवीं के टॉपर अमर उजाला दफ्तर पहुंचे और संवाद में हिस्सा लिया।
इस दौरान उनसे जानने की कोशिश की गई कि इतने अच्छे नंबर लाने के लिए उन्होंने क्या और कैसी तैयारी की? इस दौरान सभी टापर्स का एक ही जवाब था कि अच्छे नंबर लाने और टॉपर बनने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, सफलता का कोई शार्टकट नहीं है। सिर्फ मेहनत के बल पर अच्छे नंबर मिलते हैं। दसवीं के टापर्स ने कहा कि यह रिजल्ट उनके करियर की पहली सीढ़ी है। इससे समझौता नहीं करना चाहिए। टॉपर्स ने यह भी कहा कि किसी को नंबर कम मिलने का मतलब यह नहीं कि उसने मेहनत नहीं की। उसका हौसला बढ़ाएं और आगे की तैयारी में जुट जाएं।
छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें हासिल करें : अनिकेत
सीबीएसई टॉपर अनिकेत
ट्राइसिटी में दसवीं के टॉपर अनिकेत ने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य तय करने चाहिए और जब तक सभी लक्ष्य पूरे न हाें, तब तक पूरी कोशिश जारी रखनी चाहिए। परीक्षा की तैयारी के वक्त उन्होंने यही फंडा अपनाया और रिजल्ट सबके सामने है। उन्हें 98.8 प्रतिशत मार्क्स मिले हैं। हिंदी और साइंस में उनके 100 में से 100 नंबर हैं।
पंचकूला भवन विद्यालय के छात्र अनिकेत फिलहाल कंप्यूटर इंजीनियरिंग में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं। उनका सपना मुंबई आईआईटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करना है। पंचकूला सेक्टर-16 के निवासी अनिकेत के पिता डा. एआर चौधरी जियोलॉजी के प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी मां डा. मीरा चौधरी नैनो टेक्नोलॉजी में पीएचडी हैं। वह मानते हैं कि उनकी सफलता में उनके अभिभावकों और टीचर्स का बहुत सहयोग रहा है।
सफलता के टिप्स
छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करें। रोज का काम रोज करें। याद किया हुआ चैप्टर परिजनों को जरूर सुनाएं। जो टीचर बताएं वो काम जरूर करें। कभी अपने ऊपर तनाव हावी न होने दें।
‘नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी में जमीन-आसमान का अंतर’
जब अनिकेत से पूछा गया कि उनकी प्रधानमंत्री मोदी के प्रति क्या राय है तो उनका जवाब था कि वे कुछ तो कर रहे हैं। उनकी बातें काफी आकर्षक होती हैं। वे आम पब्लिक की बात करते हैं जबकि राहुल गांधी उनके विपरीत हैं। दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है।
बेसिक क्लीयर हो तो सफलता मुट्ठी में : रितिका
सीबीएसई टॉपर रितिका
दसवीं में ट्राइसिटी की सेकेंड टॉपर रीतिका चड्ढा ने 98.6 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए हैं। पंचकूला भवन विद्यालय की छात्रा रीतिका मानती हैं कि यदि बेसिक क्लीयर है तो सफलता मुश्किल नहीं है। न्यूमेरिकल की जितनी ज्यादा प्रैक्टिस करेंगे उतने अच्छे नंबर आएंगे। रीतिका ने बताया कि नौवीं तक वह सोशल मीडिया में एक्टिव थीं मगर दसवीं के पढ़ाई के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से अपना ध्यान हटा दिया। हालांकि वह इंटरनेट का इस्तेमाल तो करती थीं लेकिन सिर्फ नोट्स और होमवर्क के लिए। वह मानती हैं कि दसवीं के नंबर करियर को आगे बढ़ाने में काफी महत्व रखते हैं। अच्छे नंबर से आत्मविश्वास बढ़ता है और इससे एक दिशा मिलती है। वह सिविल सेवा में करियर बनाना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने माना कि उनके नंबर बढ़ सकते थे मगर सोशल स्टडीज में कुछ नंबर कम रह गए। उन्हें 96 नंबर मिले हैं। रीतिका के पिता सचिन चड्ढा फार्मा कंपनी में है, जबकि उनकी मां गीता चड्ढा हाउस वाइफ हैं।
सफलता के टिप्स
- बेसिक को क्लीयर करें
- न्यूमेरिकल की खूब प्रैक्टिस करें
- जो पसंद है उसे छोड़े नहीं बल्कि जरूर करें
- होमवर्क करने अलावा तीन घंटे की पढ़ाई करें
- परीक्षा के दौरान तनाव बिल्कुल न लें
‘राहुल गांधी को मिलना चाहिए मौका’
रीतिका का कहना है कि वह मौजूदा केंद्र सरकार से ज्यादा खुश नहीं हैं। जिस तरह से जनता ने नरेंद्र मोदी को पांच साल का वक्त दिया है अब जनता को राहुल गांधी को भी मौका देना चाहिए। वे युवा हैं और उनके हाल में दिए गए भाषणों से लगता है कि उनमें देश के लिए कुछ करने का जज्बा है।
ईमानदारी से की गई मेहनत सफलता जरूर दिलाएगी : अभिन्न अग्रवाल
सीबीएसई टॉपर अभिन्न अग्रवाल
ट्राइसिटी टॉपर अभिन्न अग्रवाल ने कहा कि सफलता पाने के लिए मेहनत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इसमें कोई भी शार्टकट काम नहीं करता। ईमानदारी से की गई मेहनत आपको जरूर सफलता दिलाएगी। डीपीएस से पढ़ाई करने वाले अभिन्न को दसवीं में 98.8 प्रतिशत मार्क्स मिले हैं। उन्होंने अभी से आईआईटी की तैयारी शुरू कर दी है और वह इसी में अपना करियर बनाना चाहते हैं। अभिन्न कहते हैं कि जब मन करे तब पढ़ाई करें। जबरदस्ती पढ़ने से कोई भी ज्ञान हासिल नहीं होने वाला। पढ़ाई को बोझ समझकर पढ़ेंगे तो वो बोरिंग और मुश्किल लगेगी।
सफलता के टिप्स
अपना कांसेप्ट हमेशा क्लीयर रखें। जब मन करे तभी पढ़ाई करें, बेमन से न पढ़ें। रोज का काम रोज निपटाएं। परीक्षा से पहले खूब रिविजन करें। कोई भी समस्या हो, टीचर से जरूर बात करें।
‘सभी समस्याओं की जड़ बढ़ती आबादी’
ट्राइसिटी टॉपर अभिन्न अग्रवाल मानते हैं कि देश की सभी समस्याओं की सिर्फ एक वजह है और वह है बढ़ती हुई आबादी है। वह कहते हैं कि इस वजह से कंपीटीशन बढ़ गया है। हालत यह हो गई है कि छठवीं कक्षा का बच्चा भी आईआईटी की कोचिंग पढ़ रहा है। बढ़ती आबादी को रोकने के लिए शिक्षा एक ऐसा हथियार है, जिससे सभी समस्याएं हल हो जाएंगी। अभिन्न अग्रवाल राजनीति व राजनीतिज्ञों से दूर रहना चाहते हैं।
राष्ट्रीय स्तर की कत्थक के साथ नंबरों में भी अव्वल
सीबीएसई टॉपर महक सिंगला
बारहवीं में नॉन मेडिकल में 94.6 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली महक सिंगला जितनी पढ़ाई में तेज हैं, उतनी ही कथक डांस में भी निपुण हैं। वह राष्ट्रीय स्तर की कथक डांसर हैं। कई स्टेज परफार्मेंस दे चुकी महक आर्किटेक्ट में कैरियर बनाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि वे हमेशा से उस काम को करना चाहती है, जिसमें इनोवेशन और टेक्निक की गुंजाइश हो। उनका मानना है कि पेरेंट्स और छात्रों की प्राथमिकता नंबर के बजाए नालेज की होनी चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि वे कितने घंटे पढ़ाई करती थी तो उनका जवाब था कि स्कूल के बाद दो से तीन घंटे। उन्होंने बताया कि हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। कुछ लोग छह घंटे पढ़ाई करने के बाद भी नंबर नहीं पाते तो कुछ दो घंटे की पढ़ाई कर टॉपर बन जाते हैं। कार्मल कान्वेंट स्कूल की छात्रा रही महक के पिता राकेश सिंगला एयरफोर्स में हैं, जबकि उनकी मां सुनीता सिंगला हाउसवाइफ।
नंबर लाने के लिए महक के टिप्स
रेग्युलर पढ़ाई करें। ये नहीं कि परीक्षा के दिनों में ही पढ़ें। रट्टा के बजाए समझकर पढ़ाई करें। खुद कितना तैयार है, समय-समय पर खुद की परीक्षा लेते रहे। पढ़ाई के प्रति ईमानदार बनें। परीक्षा के दौरान अपनी हॉबी से दूरी न बनाएं।
सरकार हर वर्ग के लिए होनी चाहिए
महक सिंगला मौजूदा सरकार के कामकाज से फिलहाल संतुष्ट नहीं है। जो भी सरकारे आती हैं वे उच्च वर्ग के बारे में सोचती हैं या फिर निम्न वर्ग के लिए। मध्य वर्ग के लिए बिल्कुल भी ध्यान नहीं देती। सरकारों को पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ काम करना चाहिए। नागरिकों को भी चाहिए कि वे भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं।
जब तक समझ में न आए तब तक टीचर से पूछते रहें
सीबीएसई टॉपर वसुधा सिंगला
शारदा सर्वहितकारी स्कूल की छात्रा वसुधा कपूर ने दसवीं की परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। वे एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद कार्डियोसर्जन बनना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वे स्कूल टाइम्स के बाद दो से तीन घंटे की पढ़ाई करती थीं। मगर जितनी देर पढ़ती, पूरा मन लगाकर पढ़ती थीं। उनका मानना है कि कुछ बच्चों को यदि कुछ चीज समझ में नहीं आई तो वे टीचर से पूछने में शर्माते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। जब तक चीजे समझ में न आए, तब तक टीचर से पूछते रहना चाहिए। कोशिश करें कि जिस विषय में कमजोर हैं तो उसकी ज्यादा प्रैक्टिस करें। उनके पिता रोहित कपूर स्वराज में कार्यरत्त हैं, जबकि उनकी मां प्रभा पीजीआई में अपर डिविजन क्लर्क के पद पर कार्यरत्त हैं।
नंबर लाने के लिए वसुधा के टिप्स
रेग्युलर पढ़ाई करें। सभी विषयों पर सामान ध्यान दें। खूब मेहनत करें। होमवर्क को उसी दिन निपटाएं। रोज का रोज पढ़ें और उसकी प्रैक्टिस करें।
गीत सुनना पसंद है
वसुधा ने बताया कि उन्हें हिंदी और पंजाबी गीत सुनना पसंद है। पंजाबी में उनके फेवरेट गायक जस्सी गिल हैं। जबकि बालीवुड में उनके फेवरेट हीरो रणबीर कपूर है। वे कहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काम कर हैं, जबकि उनसे पहले जो सरकारे थी, वे जनता के विश्वास पर खरी नहीं उतरीं।
बिना किसी ट्यूशन के टॉपर बनीं
सीबीएसई टॉपर गायत्री शर्मा
लारेंस स्कूल की छात्रा गायत्री शर्मा दसवीं में मोहाली की टॉपर रही हैं। उन्हें 98 प्रतिशत मार्क्स मिले हैं। उन्होंने दावा किया उन्होंने ये मार्क्स बिना किसी ट्यूशन के हासिल किए हैं। आज तक उन्होंने किसी विषय का ट्यूशन नहीं लिया है। वे कहती हैं कि जितने भी घंटे पढ़ाई में लगाए, मगर वो याद रहना चाहिए। बीच में ब्रेक जरूर लें। इससे दिमाग फ्रेश होता है। उन्होंने बताया कि जब कोई विषय कठिन लगे तो उसे फन के साथ याद करें। कभी नहीं भूलेंगे। वे अपना कैरियर बायोटेक्नोलॉजी में बनाना चाहती हैं। दसवीं के मार्क्स पर उनका कहना था कि कैरियर की दिशा में यह पहला स्टेप होता है। ऐसे में बिल्कुल भी ढिलाई नहीं करनी चाहिए। उनके पिता वीरेंद्र कुमार फार्मासिस्ट हैं, जबकि मां नीलम कुमारी हाउसवाइफ।
नंबर लाने के टिप्स
फोकस होकर पढ़ाई करें। स्कूल में जो भी पढ़ाया जाए, उसे मन लगाकर पढ़ें। याद रखने के लिए लिखकर प्रैक्टिस कर सकते हैं। अपना पसंदीदा खेल खेंले। खुद से कंपटीशन की भावना रखें
आम आदमी पार्टी को मौका मिलना चाहिए
गायत्री शर्मा से जब पूछा गया कि अगले चुनाव में किसे मौका मिलना चाहिए मोदी या राहुल को। तो उनका कहना था कि दोनों को जनता देख चुकी है। मोदी जी से पहले कांग्रेस की सरकार थी। ऐसे में राहुल के बजाए आम आदमी पार्टी को मौका मिलना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में अच्छा काम किया है। खासकर हेल्थ और एजुकेशन में।
स्मार्ट तरीके से करें पढ़ाई
सीबीएसई टॉपर समरप्रीत
मानव मंगल मोहाली के छात्र रहे समरप्रीत ने दसवीं में 97.8 प्रतिशत नंबर हासिल किए हैं। वे एग्जाम से पहले रुटीन में दो से तीन घंटे पढ़ाई करते रहे। एग्जाम के दौरान उन्होंने आठ घंटे तक पढ़ाई की है। वे मानते हैं कि स्मार्ट तरीके से पढ़ाई करनी चाहिए। स्मार्ट से उनका ताल्लुक था कि आजकल हर चीज थ्रीडी में उपलब्ध है। जो विषय समझ में नहीं आते हैं, वे थ्रीडी के माध्यम से समझे जा सकते हैं। वे इंजीनियर बनना चाहते हैं। उनके पिता मनमोहन सिंह केमिस्ट शॉप चलाते हैं जबकि उनकी मां गुरप्रीत कौर हाउसवाइफ हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सफलता में मानव मंगल स्कूल के टीचरों का अहम रोल रहा है।
नंबर लाने के समरप्रीत के टिप्स
एग्जाम के दिनों में पढ़ाई पर वक्त ज्यादा दें। जो समझ में न आए, उसका रीविजन ज्यादा बार करें। एग्जाम से एक महीने पहले पूरा कोर्स कंप्लीट हो जाए। एग्जाम के दौरान सिर्फ रिवीजन में वक्त देना चाहिए। एग्जाम में कुछ नया न पढ़े बल्कि जो पढ़ा है उसे रिपीट करें
अच्छे नंबरों से पोर्टफोलियो मजबूत बनता है
समरप्रीत मानते हैं कि दसवीं हो या बारहवीं। नंबर मायने रखते हैं। अच्छे नंबरों से पोर्टफोलियो मजबूत होता है। इंटरव्यूर के दौरान अच्छा इंपेक्ट पड़ता है। उन्होंने बताया कि उन्हें क्रिकेट खेलना अच्छा लगता है। जब उनसे पूछा गया कि धोनी बेहतर हैं या विराट। तो उनका कहना था कि विराट की परफार्मेंस स्थायी है। वे रेग्युलर नए रिकार्ड बनाते जा रहे हैं, जबकि धोनी कभी चलते तो कभी नहीं।
मां के साथ एनजीओ का काम संभाला, नंबर भी पाए
यशस्विनी मिश्रा
मानव मंगल स्कूल मोहाली की छात्रा यशस्विनी मिश्रा ने दसवीं में 91 फीसदी अंक हासिल किए। पढ़ाई के अलावा वे अच्छी एथलीट हैं। जोनल स्तर पर वे बैडमिंटन, डिस्ट्रिक लेवल पर स्वीमिंग और स्टेट लेवल पर एथलीट की खिलाड़ी रही हैं। वे रेग्युलर तीन घंटे की पढ़ाई करती हैं। वे पढ़ाई के साथ अपनी मां स्वास की एनजीओ के साथ भी काम करती हैं। समाजसेवा का काम करने के साथ वे पढ़ाई के लिए क्वालिटी का टाइम निकाल लेती हैं। जब उनकी मां बाहर रहती हैं तो वे एनजीओ में आने वाले बच्चों को पढ़ाती हैं।
नंबर लाने के यशस्विनी मिश्रा के टिप्स
ज्यादा पढ़ने के बजाए क्वालिटी पढ़ाई करें। पढ़ाई रेगुलर दो से पांच घंटे के बीच होनी चाहिए। किसी एक विषय के बजाए सभी पर फोकस करें। याद रखने की क्षमता विकसित करें। परीक्षा के दौरान खान-पान भी ध्यान रखें।
देश के विकास के लिए शिक्षा जरूरी
यशस्विनी मानती हैं कि देश के विकास के लिए शिक्षा जरूरी है। बिना शिक्षा के न तो सामजिक बुराइयों को खत्म किया जा सकता है और न ही क्राइम को। उनका यह भी कहना है कि स्टूडेंट को क्वालिटी एजुकेशन पर ध्यान देना चाहिए। जिन बच्चों के नंबर कम आते हैं, उन्हें कोसना नहीं चाहिए। बल्कि उनका हौसला बढ़ाकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
एग्जाम के पहले आठ घंटे की पढ़ाई शुरू की
सीबीएसई टॉपर कुश बंसल
ट्राइसिटी में ह्यूमैनिटीज ग्रुप में 98.8 फीसदी अंक लेकर ह्यूमैनिटीज ग्रुप में टॉप करने वाले सेंट सोल्जर स्कूल के कुश बंसल का कहना है कि उन्होंने स्टडी कभी टफ नहीं लगी। वह रेग्युलर क्लास अटेंड करते थे। तीन विषयों में से सौ अंक हासिल किए हैं। इनमें पालिटिक्ल साइंस, फिजिकल व सोशोलॉजी शामिल है। उन्होंने बताया कि उसका एक्सिडेंट हो गया था। वरना जो नंबर कम हुए हैं। वह भी कम न होते। पढ़ाई के साथ वे फुटबाल खेलने के शौकीन हैं।
इसके साथ ही टीवी व परिवार को पूरा समय देते थे। एग्जाम से एक हफ्ता पहले उन्होंने आठ से नौ घंटे की स्टडी शुरू की थी, जिसके बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने कहा कि अब नंबर गेम का जमाना बदल गया है। आपको क्या करना । यह बात आपके माइंड में बिल्कुल क्लेयर होना चाहिए। इसके बाद पूरी फोर्स से ताकत लगाकर इसे हासिल किया जा सकता है। कुछ ने बताया कि वह सीबीएसई की नेशनल लेवल की चैंपियनशिप में खेल चुके है।
रोनाल्डो को मानते है रोल मॉडल
कुश ने बताया कि स्पोर्ट्स का जीवन में काफी महत्व होता है। इससे कई तरह की स्टडी विकसित होती है। जो कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सहायत होती है। टीम भावना से लेकर टीम को लीड करना इसमें शामिल है। उन्होंने कहा कि वह फुटबाल खिलाड़ी रोनाल्डो से काफी प्रभावित है। वह उन्हें अपना रोल मॉडल भी मानते हैं। उन्होंने जीवन में संघर्ष कर सबकुछ हासिल किया है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से करेंगे पढ़ाई
कुश ने बताया कि वह दिल्ली यूनिवसिटी से अब बीए पालीटिक्ल साइंस करेंगे। इसके बाद उन्होंने सिविल सर्सिसेज के क्षेत्र में जाने के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर कोई और आप्शन भी उन्हें मिलता है तो वह इससे पीछे नहीं रहेंगे।