98.8 फीसदी अंक हासिल कर ट्राइसिटी टॉप करने वाले पंचकूला के राहुल जस्सल का कहना है कि उन्होंने पढ़ाई के लिए कभी टेंशन नहीं ली, फ्री माइंड होकर स्टडी की। राहुल आईआईटी की तैयारी के लिए चंडीगढ़ से कोचिंग कर रहे हैं। उनके पिता सुभाष चंद्र बेल फैक्ट्री में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर तैनात हैं और मां मधुबाला हाउस वाइफ हैं। बोर्ड की परीक्षा के लिए उसने कोचिंग भी ज्वाइन ली थी। अक्सर उसके पिता भी स्टडी के दौरान उसको मैथ के टिप्स देते थे। राहुल ने बताया कि स्कूल से मिले होमवर्क को मन लगाकर पूरा करता था, रूटीन रोजाना ढाई घंटे पढ़ाई करता था।
खुद पर विश्वास ही मेरा मूल मंत्र : अभिन्न अग्रवाल
ट्राइसिटी टॉपर अभिन्न अग्रवाल भविष्य में एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनना चाहते हैं इसलिए वह 11वीं की पढ़ाई नॉन मेडिकल स्ट्रीम से करेंगे। पिता विवेक भूषण भी इंजीनियर हैं और बड़ी बहन अनुभूति दिल्ली आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं। अभिन्न ने बताया कि उनका मूलमंत्र खुद पर और शिक्षकों पर विश्वास रखना और जमकर मेहनत करना है। अभिन्न का कहना है कि जो फोकस के साथ अपने काम को करते हैं, उन्हें सफलता जरूर मिलती है। वह परीक्षा के दौरान स्कूल की पढ़ाई के बाद सिर्फ चार घंटे पढ़ते थे, लेकिन उस दौरान कहीं अपना ध्यान नहीं भटकने देते थे।
इंजीनियर बनकर परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाऊंगी : पारुल
भवन विद्यालय चंडीगढ़ की छात्रा पारुल को भी इंजीनियर बनना है और उसने नॉन मेडिकल की पढ़ाई शुरू भी कर दी है। पारुल ने बताया कि वह इंजीनियर बनकर अपने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहती हैं क्योंकि उसके पिता समुंदर गुप्ता पंजाब सरकार के जल एवं सिंचाई विभाग में इंजीनियर हैं और उसके दादा बीएस सिंगला नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया में सीजीएम हैं, जबकि मां कमलेश टीचर हैं। पारुल ने बताया कि उसने एक सिस्टम से पढ़ाई की, जिसमें दो घंटे की पढ़ाई के बाद आधे घंटे का ब्रेक लिया। यही उसकी पढ़ाई की थ्योरी थी और इससे सफलता मिली।
आरुषी अपने पिता के नक्शे कदम पर चलकर चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहती हैं क्योंकि उसके पिता अशोक डूमरा सीए हैं, जबकि मां रीना गृहणी हैं। आरुषी ने बताया कि उसने अपने लक्ष्य को भेदने के लिए तैयारी शुरू कर दी है और 11वीं में कॉमर्स में दाखिला लेकर भविष्य में आगे बढ़ना चाहती हैं। आरुषी ने पढ़ाई के मूल मंत्र के बारे में बताया कि टाइम टेबल बनाकर, रिविजन के साथ छोटी-छोटी चीजों को समेटते हुए सफलता हासिल की जा सकती है। आरुषी ने बताया कि बजाय कई जगह उलझने के, विषयवार पढ़ना चाहिए क्योंकि एक समय में हर जगह उलझने से अक्सर परिणाम नकारात्मक हो जाता है।
कूल होकर पढ़ो और हर विषय का आनंद लो : अनहद
अनहद को भी अपने पिता का प्रोफेशन पसंद है और उसे पिता जसप्रीत सिंह की तरह वकील बनना है। दसवीं बोर्ड का पड़ाव पार करने के बाद अब अनहद का पूरा फोकस 11वीं की पढ़ाई पर है ताकि अच्छे नंबर लाकर बड़े लॉ संस्थान में दाखिला ले सके। अनहद ने बताया कि उसकी पढ़ाई का मूल मंत्र है कि कूल होकर पढ़ो और हर विषय का आनंद लो। ऐसा नहीं कि उसे लॉ करने का मन बनाया है, तो साइंस पर ध्यान नहीं दिया। बस आनंद लेकर पढ़ाई की और साइंस में 99 नंबर आए, जबकि गणित में अनहद के 100 नंबर हैं। अनहद की मां मनित कौर गृहणी हैं और प्रेरणास्रोत हैं।
डाक्टर बनना चाहती है अकुला
अकुला के पिता मुनीष अग्रवाल बिजनेसमैन हैं, लेकिन उसे डॉक्टर बनना है। अकुला ने बताया कि वह अपना ध्यान कहीं और नहीं भटकाना चाहती, इसलिए पूरा फोकस डॉक्टर बनने की तरफ किया है। उम्मीद के मुताबिक नंबर आए हैं और मेडिकल की पढ़ाई शुरू कर दी है। अकुला को साइंस में काफी रुचि है, जो उसके दसवीं में आए 99 नंबर से दिखती भी है। अकुला ने बताया कि उसकी पढ़ाई का मूल मंत्र है, रेगुलर स्टडी। कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए कि जब परीक्षा आए तो किताबों में डूब जाओ बल्कि अपनी पढ़ाई में रेगुलर जारी रखनी चाहिए। रोज का काम रोज सफलता की कुंजी है।
सार्थक कोहली को भविष्य में इंजीनियर बनना है और वह भी आईआईटी से पढ़कर। सार्थक के जुनून का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने नॉन मेडिकल के विषयों की ट्यूशन लेना शुरू भी कर दिया है। भले ही रिजल्ट अब आया, लेकिल उसने ट्यूशन पर जाना शुरू कर दिया है। सार्थक के पिता अशोक कोहली और मां रेणू कोहली अलग-अलग कंपनियों में कार्यरत हैं। सार्थक ने बताया कि उसकी पढ़ाई का मूल मंत्र है रिविजन। एक बार जिस पाठ को पढ़ लिया, उसके कुछ समय बाद से फिर से पढ़ना चाहिए। यह तय है कि जितनी बार रिवाइज करेंगे, हर बार कुछ नया याद होगा।
परीक्षा से एक माह पहले पूरा फोकस पढ़ाई पर रखा : रिवा
केबी डीएवी स्कूल की छात्रा रिवा गुप्ता ने 98.4 फीसदी नंबर पाकर ट्राइसिटी में संयुक्त रूप से थर्ड रैंक हासिल की है। रिवा के पिता विपिन गुप्ता फाइनेंशियल कंसलटेंट हैं, जबकि मां विजय गुप्ता गृहणी हैं। रिवा ने बताया कि उसकी पढ़ाई का मूल मंत्र सेल्फ स्टडी है। खुद से पढ़कर खुद की गलतियां ठीक करना सबसे सही तरीका है। इसके अलावा परीक्षा से एक महीने पहले पूरा फोकस सिर्फ पढ़ाई पर किया, जो इतने नंबर लाने में कारगर साबित हुआ।
माता-पिता के सपोर्ट से मिली सफलता : ईशा रावत
छात्रा ईशा रावत ने 98.6 फीसदी अंक हासिल कर ट्राइसिटी में संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त किया है। ईशा रावत ने बताया कि वह रोजाना आठ घंटे सेल्फ स्टडी करती थीं। पढ़ाई के साथ अपने को तनाव मुक्त रखने के लिए बैडमिंटन खेलती थीं। उनके पिता उत्तराखंड में सरकारी टीचर है। मां उनकी हाउस वाइफ हैं। उन्होंने बताया कि दोनों ने उनका पढ़ाई में सपोर्ट करते हुए उत्साह बढ़ाया है। इसलिए वह इस मुकाम को हासिल कर पाई हैं।
आईएएस बनना चाहती हैं रितिका
पंचकूला की रितिका चड्ढा ने दसवीं की परीक्षा में 98.6 फीसदी अंक हासिल कर ट्राइसिटी में संयुक्त रूप से सेकेंड स्थान हासिल किया है। वह आर्ट्स स्ट्रीम में पढ़ाई कर आईएएस बनना चाहती हैं। परीक्षा के दौरान रितिका ने मैथ और साइंस की कोचिंग की थी। रितिका ने बताया कि रोजाना वह 2-3 घंटे स्टडी करती थीं। वहीं, परीक्षा के समय बेहतर परिणाम के लिए नौ घंटे तक स्टडी की। इस दौरान रितिका ने स्कूल और कोचिंग में पढ़ाए गए सिलेबस को रिवाइज किया। रितिका के पिता सचिन चड्डा फार्मास्युटिकल कंपनी में हैं और मां हाउस वाइफ हैं। रितिका को बैडमिंटन खेलना, किताबें पढ़ना और म्यूजिक सुनना काफी पसंद है।