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कभी था घर से भागा, आज है अरबपति, असली 'स्लमडॉग मिलेनियर' की कहानी

Fri, 29 Apr 2016 09:47 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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सपनों ने भरी उड़ान - फोटो : gettyimages
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कोयले की खदानों वाले धनबाद में उसका घर था। पिता उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे। लेकिन वो इससे भी आगे कुछ करना चाहता था। वो जैसे-जैसे बड़ा हो रहा था, उस पर थोपे जाने वाले फैसले और विकराल होते जा रहे थे। उम्र 14 की थी जब वो पारिवारिक तनातनी के चलते घर से भाग गया। वो दिल्ली आया और मुनिरका इलाके की झुग्गी बस्ती को आशियाना बना लिया। दिल्ली में गुजर-बसर करने लिए वो दो नौकरियां करता था। दिन में घरों में पत्र-पत्रिकाएं बांटने जाया करता था और रात में चाय का स्टॉल लगाता था। 
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झुग्गी बस्ती में काम करने के दौरान एक दिन उस लड़के की नजर अंग्रेजी अखबार के एक इश्तेहार पर पड़ी। इश्तेहार बिजनेस प्लान (व्यापार कैसे किया जाए) कॉम्पटीशन का था। लड़का इंटरनेट के बढ़ते प्रसार और उसके जरिए बनती नई संभावनाओं से भलीभांति वाकिफ था तो उसने भी कॉम्पटीशन में अपना प्लान बताया। उसका प्लान सबसे अच्छा साबित हुआ और उसे विजयी घोषित किया गया। 

अखबार के कॉम्पटीशन से उसे बतौर इनाम कुछ धनराशि भी मिली। एक दोस्त के पिता बैंक में काम करते थे। उसने उनसे भी कुछ धन उधार लिया। रुपयों इकट्ठा कर उसने एक वेबसाइट बनाई। ये वेबसाइट थी वोमेनइन्फोलाइनडॉटकॉम। पोर्टल पूरी तरह से महिलाओं को समर्पित था। पोर्टल को लोगों ने हाथों-हाथ लिया।
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कभी बेचता था चाय, आज उसकी कंपनी में 300 लोग काम करते हैं

मोबाइल ऐप ब्लिपर बनाया - फोटो : gettyimages
पोर्टल से हुई कमाई से उसने लंदन का रुख किया। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उसने मास्टर डिग्री हासिल की। इस दौरान उसने कई कंपनियों के लिए काम किया। कुछ में सह-संथापक भी रहा। ब्रिटेन की इश्योरेंस कंपनी स्विफ्टकवर और सोशल नेटवर्क 'स्टक' में उसने को-फाउंडर के साथ-साथ हेड ऑफ इनोवेशन की भूमिका निभाई। साल 2007 में स्विफ्टकवर को एक्सा इंश्योरेंस ने खरीद लिया।

एक्सा इश्योरेंस में काम करते हुए उसकी मुलाकात एक और जुनूनी लड़के से हुई। दोनों ने बाजार में एक ऐप लॉन्च करने का प्लान बनाया। न्यू इंटरनेट की दुनिया में ऐप ने धूम मचा दी। हो सकता है आप भी उस ऐप का इस्तेमाल करते हों। वो ऐप है ब्लिपर। इसे बनाने वाला वो भारतीय लड़का है अंब्रीश मित्रा। ब्लिपर बनाने में उसके दोस्त ओमर तैयब का हाथ रहा। अब्रीश ब्लिपर के सीईओ है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में कंपनी के 14 ऑफिस हैं। 300 से ज्यादा लोग ब्लिपर के लिए काम करते हैं। 

ब्लिपर को साल 2011 में यूके में लॉन्च किया गया था। तब से यूनिलीवर, प्रॉक्टर एंड गैंबल, पेप्सिको, नेसले, हेंज, कोका कोला, लॉरियार और जैगुआर जैसे ब्रांड कंपनी के पार्टनर हैं।
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अंग्रेज सरकार भी धनबाद के इस लड़के की मुरीद

अरबों की कंपनी के आसामी अंब्रीश मित्रा - फोटो : gettyimages
ब्लिपर ऐप आईओएस, एंड्रॉयड, विडोज पर उपलब्ध है। ब्लिप का हिंदी में अर्थ होता रडार लक्ष्य। ये ऐप भी रडार की तरह आस-पास की चीजों को स्कैन करता है और पलक झपकते ही उनसे जुड़ी सारी जानकारियां मुहैया करा देता है। 

अंब्रीश के बनाए ब्लिपर से लाखों लोग अपनी नॉलेज में इजाफा कर रहे हैं और कंपनी अरबों कमा रही है। अब्रीश की लीडरशिप में कंपनी कई अवॉर्ड अपने नाम कर चुकी है। पिछले साल सीएनबीसी ने टॉप 50 कंपनियों में ब्लिपर को 19वीं रैंक पर रखा था। जनवरी 2016 में ब्लूमबर्ग ने ब्लिपर को यूके की टॉप बिजनेस इनोवेटर्स की लिस्ट पहले नंबर पर रखा। 

धनबाद के इस लड़के का लोहा अंग्रेजी सरकार ने भी माना और इसी साल फरवरी में उसे ब्रिटिश सरकार के ग्रेट ब्रिटेन अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया। 

आज 37 वर्षीय अब्रीश भारत ही नहीं दुनियाभर के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणाश्रोत बने हुए हैं।

अब्रीश कहते हैं कि जीवन एक लहर की तरह है। जिसमें सुख, दुख, कठिनाईयां, सफलता, असफलता, अवसर सब बहकर आते हैं। जब भी लगें कि लहरें हमें कुछ सिखाना चाहती हैं, तो उनसे भागने की बजाए उनकी सवारी करनी चाहिए। हालातों का डटकर सामना करना चाहिए।
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