डिपोर्टेशन का डर और छिपने की मजबूरी
कई छात्रों को अचानक डिपोर्टेशन का डर सताने लगा है, जिस कारण वे देश छोड़ चुके हैं या छिपने को मजबूर हैं। कई छात्रों का कहना है कि उनके रिकॉर्ड में बस छोटी-मोटी गलती थी या उन्हें पता ही नहीं चला कि उनका वीजा क्यों रद्द हुआ। हालांकि कुछ मामलों में अदालत के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने निर्णय को वापस लिया, लेकिन साथ ही ऐसी नई गाइडलाइंस भी जारी कीं, जिनके तहत छात्रों की स्थिति भविष्य में और भी आसानी से समाप्त की जा सकती है।
अब यदि किसी छात्र का वीजा रद्द हो गया, तो वह अमेरिका में रह तो सकता है लेकिन दोबारा प्रवेश नहीं कर पाएगा।
कॉलेज प्रशासन और वकीलों की बढ़ती चिंता
एक मिशिगन कॉलेज के कर्मचारी के अनुसार, अब छात्र लगातार पूछ रहे हैं कि क्या उन्हें गर्मियों में यात्रा करनी चाहिए या नहीं। उन्होंने बताया "हर सवाल का जवाब देना अब मुश्किल हो गया है।"
नॉर्थ कैरोलिना के इमिग्रेशन वकील ऋषि ओजा कहते हैं “हम लगभग हर दिन यात्रा से जुड़े सवालों से जूझ रहे हैं। यह चिंता की बात है कि छात्र डरे हुए हैं कि अगर वे गए तो क्या वापस लौट पाएंगे।” छात्रों को अब सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा के दौरान अपने इमिग्रेशन दस्तावेज, कॉलेज ट्रांसक्रिप्ट और अगर कोई केस हुआ हो तो कोर्ट के दस्तावेज साथ रखें।
"मैं डरा हुआ हूं कि शायद वापस ना लौट पाऊं"
यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय में पढ़ रहे एक छात्र ने बताया कि उन्होंने एशिया में अपने घर की यात्रा की योजना बनाई है और टिकट भी खरीद लिया है, लेकिन मन में डर बना हुआ है। उन्होंने चिंता व्यक्त की "मुझे डर है कि शायद मैं लौट ही न पाऊं।"