बच्चों को पढ़ाए जाएंगे आरएसएस का इतिहास, योगदान और सामाजिक कार्य
पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में, बच्चों को आरएसएस की उत्पत्ति और इतिहास, इसकी विचारधारा और प्राकृतिक आपदाओं और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सहायता प्रदान करने में इसके कार्यकर्ताओं की भूमिका के बारे में पढ़ाया जाएगा। एक सूत्र ने पीटीआई को बताया कि इन पाठों का उद्देश्य संगठन के बारे में गलत धारणाओं को दूर करना भी है।
उनके अनुसार, पाठ में उल्लिखित योगदान स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस की भागीदारी के साथ-साथ उसके सामाजिक कार्यों, जैसे रक्तदान अभियान, खाद्य आपूर्ति, केदारनाथ और बिहार बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान बचाव कार्य और कोविड महामारी के दौरान राहत गतिविधियों पर प्रकाश डालेंगे।
द्वारा स्थापित आरएसएस के इतिहास का भी पता लगाएगा। यह सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व पर संगठन के फोकस को रेखांकित करेगा और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं का उल्लेख करेगा जो इससे जुड़े रहे हैं। एक अलग खंड गुमनाम नायकों को समर्पित होगा।
शिक्षक पुस्तिकाएं है तैयार
उन्होंने कहा कि शिक्षक पुस्तिकाएं पहले ही तैयार कर ली गई हैं और एससीईआरटी में प्रशिक्षण सत्र चल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पाठ्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी पर अभी भी चर्चा की जा रही है, जिसमें यह निर्णय भी शामिल है कि कौन से कक्षा समूह नए अध्यायों का अध्ययन करेंगे।
पीटीआई के मुताबिक, सूत्र ने कहा, "छात्रों को शासन, लोकतंत्र और सक्रिय नागरिकता का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए यह पाठ्यक्रम सभी कक्षाओं में शुरू किया जा रहा है।"
राष्ट्रनीति कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 18 सितंबर को भारत मंडपम में 'नमो विद्या उत्सव' के तहत शुरू किए गए तीन नए पाठ्यक्रमों में से एक के रूप में किया।