बिहार बोर्ड की 12वीं परीक्षा में सफल घोषित होने के लिए छात्रों को थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों को मिलाकर न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक हासिल करना अनिवार्य होता है। यदि किसी छात्र के अंक इस निर्धारित सीमा से कम रह जाते हैं, तो उसे अनुत्तीर्ण माना जाता है।
अगर किसी छात्र के अपेक्षा से कम अंक आए हैं या वह एक, दो या अधिक विषयों में असफल रहा है, तो उसके पास मुख्य रूप से दो विकल्प उपलब्ध होते हैं। ये विकल्प न केवल उसके अंकों में सुधार का मौका देते हैं, बल्कि उसके पूरे शैक्षणिक वर्ष को भी बचा सकते हैं।
क्या है कंपार्टमेंटल और विशेष परीक्षा?
जो छात्र एक या दो विषयों में फेल हो जाते हैं, उनके लिए कंपार्टमेंटल परीक्षा एक महत्वपूर्ण विकल्प है। इसके माध्यम से छात्र उसी वर्ष दोबारा परीक्षा देकर पास हो सकते हैं। इससे उन्हें पूरे साल का नुकसान नहीं उठाना पड़ता और वे अपने शैक्षणिक क्रम को जारी रख सकते हैं।
विशेष परीक्षा वो परीक्षा है जो छात्रों को एक और मौका देने के लिए होती है। अगर कोई छात्र किसी कारण से साधारण परीक्षा में नहीं दे पाया या फेल हो गया, तो वह इस परीक्षा में शामिल होकर पास हो सकता है।