इंजीनियरिंग स्नातकों की संख्या मांग की तुलना में दोगुने से भी अधिक बढ़ चुकी है। अनुमान है कि हर साल आठ लाख इंजीनियर बन रहे हैं, जिनमें पांच लाख को रोजगार नहीं मिल पा रहा। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरियां अनिश्चितताओं से भरी हैं।
उद्योगों का कहना है कि इंजीनियरिंग संस्थान पुराने कोर्स पढ़ा रहे हैं, जिनकी जरूरत कम है। प्रतिष्ठित कॉलेजों से बीटेक विद्यार्थी भी कमतर नौकरियों में जा रहे हैं तो कई मेक इन इंडिया व स्किल इंडिया से जुड़कर स्टार्ट-अप पर जोर दे रहे हैं।
महंगी पढ़ाई, नौकरी नहीं
- आईआईटी, एमएनआईटी में दाखिले के लिए आठ से 10 लाख विद्यार्थी दो से चार साल महंगी कोचिंग लेते हैं। 23 आईआईटी में 12,279 सीटें, 31 एनआईटी में 18,602, 24 ट्रिपलआईटी में 4023 और 24 केंद्रीय तकनीकी संस्थानों में 4703 सीटें हैं। इन्हें और 10 प्रमुख विश्वविद्यालयों को मिलाकर 40 हजार सीटें मिली हैं, जिन्हें प्रतिष्ठित मानते हैं। बाकी विद्यार्थी निजी कॉलेजों में प्रवेश ले लेते हैं।
- कुछ फिर आईआईटी की कोचिंग करते हैं। कई निजी कॉलेजों की 75 फीसदी तक सीटें खाली रह जाती हैं। स्थिति यह है कि कॉलेज बंद हो रहे हैं या जीरो सेशन चला रहे हैं।
- डिग्री लेकर निकले इंजीनियरों को उचित नौकरी तक नहीं मिल पा रही है। 60 फीसदी से अधिक इंजीनियर बैंक क्लर्क, रेलवे, पटवारी जैसी परीक्षाओं के लिए आवेदन कर रहे हैं तो संविदा तक पर काम करने को राजी हो रहे हैं।