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नीट परीक्षा में टॉप करने वाले शोएब की कहानी, जो बचपन से ही बनना चाहते थे डॉक्टर

Sat, 17 Oct 2020 11:25 AM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला
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नीट टॉपर शोएब आफताब - फोटो : सोशल मीडिया
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ओडिशा के राउकरेला निवासी शोएब आफताब ने इस साल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में शीर्ष स्थान हासिल किया है। उन्होंने 99.99 स्कोर हासिल करके इतिहास रचा है। शोएब 720 में से 720 नंबर लाए हैं, जिसकी उनको भी उम्मीद नहीं थी। वह पिछले ढ़ाई साल से राजस्थान के कोटा में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। परिवार को उनकी इस सफलता पर गर्व है और शोएब भी इसे लेकर बेहद खुश हैं।

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बचपन से ही बनना चाहते थे डॉक्टर
उनका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था। वह पिछले ढ़ाई साल से ओडिशा से कोटा आकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। इसके साथ ही वह अपनी स्कूली पढ़ाई पर भी ध्यान दे रहे थे। इस दौरान वह एक बार भी अपने घर नहीं गए। बल्कि, उनको सहयोग और समर्थन देने के लिए उनकी मां और बहन भी कोटा में ही रह रही थीं।

शोएब के पिता व्यापारी हैं, जो पहले चाय का व्यापार करते थे और उसके बाद उन्होंने निर्माण के व्यवसाय में कदम रखा। शोएब कहते हैं, 'मैं जब आठवीं कक्षा में था उस वक्त मेरे पिता को चाय के व्यापार में जबरदस्त नुकसान हुआ, जिसकी बदौलत उन्होंने अपना व्यवसाय ही बदल लिया। लेकिन इसके बाद भी उनके परिवार ने उनको पूरा समर्थन दिया और पढ़ाई करने के लिए उनके साथ खड़े रहे।'
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परिवार का पहला सदस्य जो मेडिकल की पढ़ाई करेगा
शोएब अपने परिवार के पहले सदस्य हैं, जो कि मेडिकल की पढ़ाई करेंगे। उन्होंने इसी साल बारहवीं कक्षा पास की है और पहले ही प्रयास में नीट में देशभर में शीर्ष स्थान हासिल किया। बारहवीं में शोएब के 95.8 फीसदी नंबर थे, जबकि उन्होंने दसवीं कक्षा की परीक्षा 96.8 फीसदी अंकों के साथ पास की थी। वह मेडिकल की पढ़ाई खत्म करने के बाद कार्डियेक सर्जन बनना चाहते हैं।

औसत छात्र से आगे बढ़कर मेहनत की बदौलत हासिल की छात्रवृत्ति
ऐसा नहीं है कि शोएब पहले से ही पढ़ाई में काफी तेज थे। वह खुद कहते हैं कि पहले वह पढ़ाई में ज्यादा घंटे तक नहीं बैठ पाते थे, लेकिन उन्होंने इस पर काफी मेहनत की और पढ़ाई करने के आदत में सुधार किया। वह कहते हैं, 'ग्यारहवीं कक्षा में मेरे नंबर ज्यादा अच्छे नहीं थे। उस वक्त मैं ज्यादा देर तक पढ़ाई भी नहीं कर पाता था। लेकिन मैंने मेहनत की और अपनी इस आदत में सुधार किया, जिसकी बदौलत मैं छात्रवृत्ति पाने में कामयाब रहा।'

उन्होंने अपने स्कूल की पढ़ाई और नीट की तैयारी दोनों ही साथ-साथ मैनेज की। वह स्कूल के बाद सीधे अपने कोचिंग क्लासेस जाते थे और उसके बाद घर पर भी दो से तीन घंटे तक जमकर पढ़ाई करते थे। वह कहते हैं कि मैं स्वाध्याय के लिए तीन घंटे देने से खुश नहीं था। ऐसे में मैंने सोचा कि छुट्टियों और रविवार के दिन को पूरी तरह से पढ़ाई के लिए समर्पित करना ही ठीक रहेगा।।  इस तरह उनदिनों मैंने 13-14 घंटे मेहनत की और जमकर पढ़ाई की। शोएब अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां को देते हैं, जो हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी रहीं।

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