महाराष्ट्र सरकार को कोविड-19 महामारी के बीच अंतिम वर्ष की परीक्षाएं निरस्त करने का कोई अधिकार नहीं है। यह बात बंबई उच्च न्यायालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शुक्रवार को कही। दरअसल, एक याचिका में परीक्षाएं निरस्त करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी।
बता दें कि राज्य सरकार ने पिछले महीने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और कहा था कि उसे महामारी अधिनियम तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत ऐसा करने का अधिकार है। बहरहाल, सेवानिवृत्त शिक्षक और पुणे से विश्वविद्यालय सीनेट के पूर्व सदस्य धनंजय कुलकर्णी की याचिका के जवाब में यूजीसी ने हलफनामा दाखिल कर यह बात कही है।
यूजीसी ने दलील दी थी कि उपरोक्त कानूनों को विश्वविद्यालय अनुदान आयुक्त अधिनियम जैसे विशेष कानून के वैधानिक प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के लिए लागू नहीं किया जा सकता।
आयोग ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का फैसला यूजीसी के 29 अप्रैल और छह जुलाई, 2020 को जारी दिशानिर्देशों के प्रतिकूल है, जिसमें सभी विश्वविद्यालयों और संस्थानों से सितंबर, 2020 के अंत तक परीक्षाएं कराने के लिए कहा गया था।
यूजीसी ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द करने या बिना परीक्षाओं के छात्रों को डिग्री प्रदान करने का महाराष्ट्र सरकार का फैसला सीधे तौर पर देश में उच्च शिक्षा के मानकों को प्रभावित करने वाला है।
इसमें कहा गया कि परीक्षाओं के मानकों के नियमन के लिहाज से यूजीसी सर्वोच्च इकाई है। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्त की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की है।