खुद को परखें
गुस्सा भी बाकी भावनाओं की तरह हमें कुछ बताता है। यह इशारा करता है कि हमारी कोई जरूरत पूरी नहीं हो रही या हमें अनदेखा किया जा रहा है। इसलिए सबसे जरूरी है अपने गुस्से को पहचानना। अक्सर हम गुस्से को दवा देते हैं, इसलिए समझ ही नहीं पाते कि हम नाराज हैं। ऐसे में थोड़ा रुककर सोचें कि गुस्सा क्यों आया। अगर सामने वाले के व्यवहार की कोई वजह समझ में आ जाए, तो गुस्सा अपने आप कम हो सकता है। और अगर वजह सही न लगे, तो संभव है कि वह व्यक्ति अपनी गलती समझकर अपना व्यवहार बदल ले।
अनुभव लिखते चलें
कई बार पैसिव-एग्रेसिव व्यवहार हमारी आदत बन जाता है और हमें पता भी नहीं चलता। इसे समझने का आसान तरीका है कि उन हालात को लिखें, जब आपको गुस्सा आया, जैसे-किसी सहकर्मी की लापरवाही या किसी का आपको नीचा दिखाना। जब आप ऐसे अनुभव लिखते हैं, तो धीरे-धीरे समझ आने लगता है कि किन लोगों या परिस्थितियों से आपको बार-बार गुस्सा आता है। साथ ही यह भी नोट करें कि उस समय आप क्या सोच रहे थे। इससे अपने व्यवहार को पहचानना और सुधारना आसान हो जाता है।
चुप्पी तोड़े और बात करें
यह व्यवहार तब शुरू होता है, जब हम अपना गुस्सा दबा लेते हैं। अक्सर हम सोचते हैं कि गुस्सा दिखाना गलत है या इससे रिश्ते खराब हो जाएंगे। कभी-कभी पुराने अनुभव भी इसकी वजह बनते हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि या तो अपने गुस्से को शांत करें या फिर चुप्पी तोड़कर बात करें। यह आसान नहीं होता और डर भी लगता है, लेकिन अपने लिए बोलना जरूरी है। लंबे समय तक चुप रहकर मन में नाराजगी रखने से बेहतर है कि अपनी बात साफ और सम्मान के साथ कह दी जाए।
छोटे अभ्यास अपनाएं
जब कोई आपको गुस्सा दिलाए, तो यह आप पर है कि आप कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। सबसे पहले गुस्सा बढ़ने से पहले खुद को शांत करें। इसके बाद ताने या चुप्पी की जगह साफ और सीधे तरीके से बात करें। तुरंत तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लें, दस तक गिर्ने, शांत संगीत सुनें, थोड़ी देर टहलें या ताजी हवा लें। ऐसे छोटे अभ्यास आपको गुस्से को समझने, पैसिव-एग्रेसिव व्यवहार छोड़ने और शांतिपूर्वक बातचीत करने में मदद कर सकते हैं।