शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के हिन्दुस्तान इंस्टीट्यूट्स ऑफ मैनेजमैंट एंड कम्प्यूटर साइंस में 18 अगस्त को यूथ कॉन्फ्रेंस का अयोजन होने जा रहा है। 72वें स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए आयोजित की जा रही इस यूथ कॉन्फ्रेंस की थीम है- ''राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका''।
आज के दौर की चुनौतियों को देखते हुए जो सबसे बड़ी समस्या नजर आती है, वह है- 'युवाओं के लिए रोल मॉडल' का न होना। धर्म और जातिवाद आज उतनी बड़ी समस्या नहीं हैं। दिक्कत यह है कि मौजूदा दौर की लीडरशिप नैतिक और सैद्धांतिक स्तर पर देश को प्रेरित करने में असफल साबित हुई है।
किसी भी राष्ट्र के निर्माण में सबसे अहम भूमिका युवाओं की होती है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि युवा खुद पर भरोसा करें और राष्ट्र निर्माण में अपने कर्तव्य को निभाएं। यहां राष्ट्र निर्माण का मतलब समझना भी आवश्यक है। राष्ट्र निर्माण सही मायने में तभी हो सकता है जब विकास में संतुलन हो।
किसी भी देश के विकास में 4P's का बड़ा अहम रोल होता है- पावर्टी मतलब गरीबी, पॉपुलेशन यानी आबादी, पॉल्यूशन मतलब प्रदूषण और पॉलिटिक्स मतलब राजनीति। यूं तो भारत के पास युवाओं की शक्ति है। हम युवा राष्ट्र हैं, लेकिन इसका लाभ तभी मिल सकता है, जब युवा आगे बढ़कर जिम्मेदारी लें और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाएं।