उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों को निर्देश दिया है कि लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से परिवहन शुल्क न वसूला जाए। माध्यमिक शिक्षा की प्रमुख सचिव अराधना शुक्ला का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से जब सूबे के सारे स्कूल बंद हैं तो ऐसे में निजी स्कूल अभिभावकों से परिवहन शुल्क नहीं वसूल सकते।
उन्होंने कहा कि स्कूल अभिभावकों से तीन महीने का अग्रिम शुल्क भी नहीं वसूल सकते हैं। स्कूल अभिभावकों से मासिक आधार पर शुल्क लें। इतना ही नहीं, शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है कि अगर कोई अभिभावक शुल्क देने में समर्थ नहीं है, तो निजी स्कूलों के प्रबंधकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए और ऐसे अभिभावकों को शुल्क में रियायत देनी चाहिए।
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माध्यमिक शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है कि शुल्क जमा न कर पाने की स्थिति में किसी भी विद्यार्थी का स्कूल से नाम न काटा जाए। इसके अलावा, किसी भी छात्र को स्कूलों की तरफ से चलाई जा रही ऑनलाइन शिक्षा से वंचित भी न किया जाए।
शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद अब निजी स्कूल किसी भी अभिभावक पर परिवहन शुल्क देने का दबाव नहीं बना सकते हैं। गौरतलब है कि इस वक्त देश में कोरोना वायरस से बचाव के लिए दूसरे चरण का लॉकडाउन चल रहा है जो कि तीन मई तक है। ऐसे में सभी स्कूल और कॉलेज बंद हैं। विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। बता दें कि शिक्षा विभाग ने यह आदेश लगातार अभिभावकों की तरफ से मिल रही शिकायतों के बाद जारी किया है। कई अभिभावकों ने निजी स्कूलों पर स्कूल बंद होने के दौरान भी परिवहन शुल्क मांगने का आरोप लगाया था और इस संबंध में शिक्षा विभाग से शिकायत की थी।