फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अभिभावकों की मजबूरी: छोटी कक्षाओं की फीस जेब पर भारी, दाखिले के लिए 60 से 70 हजार पड़ रहे देने

Mon, 29 Mar 2021 05:47 AM IST
Jeet Kumar रश्मि शर्मा, नई दिल्ली।

सार

  • बच्चों के स्कूल में दाखिले के नाम पर 60 से 70 हजार रुपये देने के लिए अभिभावक मजबूर
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र के लिए बढ़ी फीस अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। कक्षा चाहे छोटी हो या बड़ी, स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से मुंहमांगी फीस वसूल रहे हैं।

विज्ञापन


कुछ स्कूलों ने तो नए सत्र के लिए सरकारी आदेशों का उल्लंघन करते हुए फीस में बढ़ोतरी भी कर दी है। स्कूल प्रबंधन कक्षाओं के हिसाब से विकास शुल्क, वार्षिक, गतिविधि और परिवहन शुल्क के नाम पर 50 से 70 हजार रुपये तक मांग रहे हैं।

निजी स्कूलों ने अपने फीस के ढांचे में तमाम तरह के शुल्क शामिल कर लिए हैं। इनमें वार्षिक शुल्क, रखरखाव शुल्क, ई-लर्निंग शुल्क, गतिविधि शुल्क, मैगजीन शुल्क व खाने का शुल्क शामिल है, जो कि वार्षिक से लेकर प्रतिमाह तक हैं।
विज्ञापन


कुछ स्कूलों ने कुल राशि के रूप में फीस का ढांचा जारी किया है, जिसमें यह नहीं बताया गया है कि किस शुल्क के रूप में कितनी फीस ली जाएगी। सबसे ज्यादा परेशानी विकास व वार्षिक शुल्क को लेकर है। यह राशि 9 से 15 हजार रुपये तक है। एक नामी स्कूल ने गतिविधि शुल्क के लिए 30 हजार रुपये अभिभावकों से मांगे हैं। मिड-डे मील के रूप में 12 हजार रुपये वार्षिक फीस में जोड़े गए हैं।

निदेशालय को करनी चाहिए कार्रवाई : एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा कहते हैं कि काफी अभिभावकों से फीस व शुल्क को लेकर तरह-तरह की शिकायतें मिल रही हैं।

कोरोना के कारण अभिभावकों को राहत दी गई थी कि स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस और दाखिला फीस ले सकते हैं। स्कूल फीस रिफंड पॉलिसी को भी नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो स्कूल आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं उनके खिलाफ निदेशालय को कार्रवाई करनी चाहिए।

पत्र लिखकर फीस बढ़ाने की मांग
एक्शन कमेटी ऑफ अनएडेड रिकॉग्नाइजेड प्राइवेट स्कूल ने फीस बढ़ाने की मांग को लेकर शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि स्कूलों को नए सत्र के लिए विकास व वार्षिक शुल्क लेने की अनुमति दी जाए।

कमेटी का तर्क है शिक्षक व स्टाफ को वेतन देने में मुश्किल आ रही हैं। स्कूल इमारत के रखरखाव के खर्चों में भी परेशानी आ रही है।
कुछ स्कूलों ने सरकारी आदेशों का उल्लंघन कर नए सत्र के लिए फीस बढ़ाई

मनमानी फीस की नहीं कर सकते हैं मांग
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन अध्यक्ष आरसी जैन कहते हैं कि दिल्ली सरकार ने कोरोना के कारण बीते अगस्त में सिर्फ ट्यूशन व दाखिला फीस लेने के लिए कहा था। यदि स्कूल मनमर्जी से तरह-तरह के शुल्क के रूप में फीस मांग रहे हैं तो वह सरकारी आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। स्कूलों की ओर से फीस को लेकर मामला अभी कोर्ट में लंबित है। ऐसे में तब तक स्कूल मनमानी फीस की मांग नहीं कर सकते हैं। फीस बढ़ाने को लेकर भी सरकार का कोई आदेश नहीं आया है।

मांगा जा रहा पिछला बकाया
दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम का कहना है कि अभिभावकों से शिकायत आ रही हैं कि स्कूल पिछला बकाया भी मांग रहे हैं। कुछ स्कूलों की फीस बढ़ाने की शिकायतें भी मिली हैं।

वह बताती हैं कि एक नामी स्कूल ने तो 11वीं-12वीं के लिए लैब शुल्क के रूप में 7 हजार से अधिक शुल्क मांगा है। ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर अभिभावकों से 350 से 1500 रुपये तक मांगे जा रहे हैं। अब जब स्कूल नर्सरी से आठवीं तक के लिए स्कूल बंद हैं तो यह शुल्क क्यों मांगे जा रहे हैं। शिक्षा निदेशालय को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें