विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत की केंद्र सरकार ने हायर एजुकेशन पर अपना कंट्रोल बढ़ाया है, जिससे यूनिवर्सिटी के कामकाज, लीडरशिप की नियुक्तियों और एकेडमिक प्राथमिकताओं पर असर पड़ा है। यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेटर्स ने ऐसे कदम उठाए जिनसे कैंपस में बातचीत और बहस पर रोक लगी; इनमें फैकल्टी सदस्यों को हटाना, एकेडमिक इवेंट्स रद्द करना और छात्रों की अभिव्यक्ति को सीमित करने वाली नई नीतियां लागू करना शामिल है।"
रिपोर्ट में आगे कहा गया, "विरोध-प्रदर्शनों या कैंपस में होने वाले अन्य कार्यक्रमों के दौरान छात्रों और पुलिस, दोनों ने हिंसा की। 2026 में एकेडमिक आज़ादी 'बहुत ज्यादा सीमित' थी।"
इसमें यह आरोप भी लगाया गया कि सत्ताधारी बीजेपी ने हायर एजुकेशन पर "सरकारी प्रभाव के मुख्य जरिया" के तौर पर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) का इस्तेमाल जारी रखा।
इसमें कहा गया है, "हाल के वर्षों में UGC की उन नीतियों के लिए आलोचना हुई है जिनसे विश्वविद्यालयों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ने की बात कही जाती है। इनमें वाइस-चांसलर के लिए एकेडमिक योग्यता की शर्तों में ढील देना और नॉन-परमानेंट या कॉन्ट्रैक्ट फैकल्टी पर लगी 10 प्रतिशत की सीमा को हटाकर एकेडमिक स्टाफ के काम को कैजुअल (अस्थायी) बनाना शामिल है।"