क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश?
हर शिक्षण संस्था को मानसिक स्वास्थ्य नीति अपनानी होगी, जो ‘उम्मीद’, ‘मनोदर्पण’ और राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम नीति से प्रेरित हो।
- यह नीति वेबसाइट और सूचना पट्टों पर उपलब्ध होनी चाहिए और हर साल अपडेट होनी चाहिए।
- 100 या उससे अधिक छात्रों वाले संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की नियुक्ति अनिवार्य होगी - जैसे प्रशिक्षित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या सामाजिक कार्यकर्ता।
- छोटे संस्थानों को बाहरी विशेषज्ञों से लिंक बनाना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर छात्र उन्हें रेफर किए जा सकें।
- छात्रावासी संस्थानों को छतों, बालकनियों और पंखों जैसी जगहों पर सुरक्षा उपकरण लगाने होंगे, जिससे आत्महत्या की घटनाएं रोकी जा सकें।
- कोचिंग संस्थानों को छात्रों को प्रदर्शन के आधार पर अलग बैच में डालने, सार्वजनिक अपमान या असामान्य लक्ष्य देने से रोक दिया गया है।
- जाति, वर्ग, लिंग, धर्म, विकलांगता या यौन पहचान के आधार पर उत्पीड़न, यौन हिंसा या रैगिंग के मामलों के लिए गोपनीय और सुलभ शिकायत निवारण प्रणाली बनाना अनिवार्य होगा।
- शिकायतकर्ता छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की बदले की कार्रवाई पर "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनानी होगी।
- ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की तत्काल सहायता सुनिश्चित करनी होगी और छात्र की शारीरिक व मानसिक सुरक्षा सर्वोपरि मानी जाएगी।
- अगर संस्थान की लापरवाही से छात्र आत्महत्या करता है, तो संस्थान को कानूनी व प्रशासनिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
कोचिंग हब्स पर विशेष ध्यान
कोर्ट ने कोटा, जयपुर, चेन्नई, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद जैसे कोचिंग केंद्रों को विशेष सतर्कता के साथ मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय लागू करने का निर्देश दिया है।
नियम बनाने का आदेश
सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो महीने के भीतर निजी कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीकरण, छात्र सुरक्षा नियम और शिकायत निवारण व्यवस्था लागू करने को कहा गया है।
राष्ट्रीय टास्क फोर्स और केंद्र से जवाबतलबी
सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश भी दिया है, जो उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य पर काम करेगी।
केंद्र सरकार को 90 दिनों के भीतर पालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें बताए जाए कि इन निर्देशों को लागू करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। अगली सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी।
विशाखापट्टनम के NEET छात्र की मौत का मामला CBI को सौंपा
कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया जिसमें NEET की तैयारी कर रहे 17 वर्षीय छात्र की संदिग्ध मौत की जांच CBI को सौंपने से इनकार कर दिया गया था। अब यह जांच CBI की देखरेख में होगी और मामले की निगरानी एक वरिष्ठ अधिकारी करेगा।