रिजल्ट रुकने से पढ़ाई और एडमिशन पर पड़ा असर
याचिका में आगे कहा गया है कि परिणाम लंबे समय से रुका होने के कारण छात्र की पढ़ाई को काफी नुकसान हुआ है।
छात्र प्रांशु पटेल ने कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बी.टेक कोर्स के लिए एक विश्वविद्यालय में एडमिशन के लिए आवेदन किया था और जरूरी फीस भी जमा की थी। याचिका के अनुसार, उस विश्वविद्यालय ने 1 जून तक 12वीं के रिजल्ट की स्थिति अपडेट करने को कहा था।
याचिका में कहा गया है "परिणाम घोषित न करने के कारण याचिकाकर्ता प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के अवसर से वंचित हो गया है और अन्य संस्थानों में आवेदन करने में भी असमर्थ है।"
उसने आरोप लगाया है कि अधिकारियों का यह फैसला मनमाना, अनुचित और भेदभावपूर्ण है, जिससे उसके संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख
याचिका में आगे बताया गया है कि छात्र ने पहले संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली हाईकोर्ट में भी मामला दायर किया था। लेकिन कोर्ट की छुट्टियों के दौरान इस मामले को जरूरी नहीं माना गया, इसलिए इसे अवकाश पीठ के सामने नहीं रखा गया।
याचिका में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में छात्र के पास कोई दूसरा प्रभावी विकल्प नहीं बचा, इसलिए उसने सुप्रीम कोर्ट में जाकर अपने रिजल्ट की घोषणा और अपने शैक्षणिक भविष्य की सुरक्षा के लिए राहत मांगी है।
छात्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि CBSE को निर्देश दिया जाए कि वह पश्चिम एशियाई देशों के लिए बनाई गई मूल्यांकन योजना के अनुसार उसका 12वीं का रिजल्ट घोषित करे।
वैकल्पिक रूप से, याचिका में यह भी मांग की गई है कि जिन विषयों की परीक्षा रद्द हुई थी, उनके लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जाए और आवश्यक राहत प्रदान की जाए।