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समर ट्रेनिंग से लौटे संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्र, बड़ी कंपनियों में लिया प्रशिक्षण

Wed, 05 Sep 2018 06:27 PM IST
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संस्कृति यूनिवर्सिटी
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मथुरा। संस्कृति यूनिवर्सिटी युवा पीढ़ी को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में दक्ष करने के लिए न केवल लेटेस्ट तकनीक को प्रमुखता दे रही है। बल्कि उसका प्रयास है कि, छात्र बड़ी-बड़ी कंपनियों की कार्यप्रणाली को भी अच्छे से समझें। इसी मकसद से यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने देश की बड़ी  कंपनियों से अनुबंध किए हैं। जिसके तहत संस्कृति यूनिवर्सिटी में टेक्निकल एजुकेशन ले रहे छात्र-छात्राओं को समर ट्रेनिंग पर भेजा गया था। तकनीकी शिक्षा के छात्र-छात्राएं इंडियन रेलवे, बीएचईएल, टाटा मोटर्स, एस्कॉर्ट लिमिटेड, भिलाई स्टील प्लांट, उत्तर प्रदेश जल निगम, पीडब्ल्यूडी, आरईएस, जिंदल ग्रुप, टीसीएस, विप्रो, एरिस्ट्रोकेट, बीपीसीएल, मारुति उद्योग, हीरो ग्रुप आदि कंपनियों से समर ट्रेनिंग लेकर लौट आएं हैं। 
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कंपनियों से प्रशिक्षण लेकर लौटे छात्र-छात्राओं में भाव्या कुमारी, ज्योति प्रकाश, मोनिका, तारणा कुमारी, जीशान, बादाम सिंह, सत्यजीत कुमार, विभव गुप्ता, कन्हैया सिंह, पवन कुमार, वेद प्रकाश, बुलबुल गोयल, नताशा गुप्ता, अनमोल, संजू, प्रिंस, आशीष कुमार साहू, केशव शर्मा आदि ने इस प्रशिक्षण को करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण करार दिया।

संस्कृति यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने गर्मी की छुट्टियों में छात्र-छात्राओं के समय के सदुपयोग के लिए उन्हें देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों में प्रशिक्षण दिलाने के लिए भेजा था। इस कड़ी में यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने टेक्निकल एजुकेशन के सेकेंड और थर्ड ईयर के छात्र-छात्राओं को 45 से 60 दिनों की समर ट्रेनिंग के लिए विभिन्न कंपनियों में भेजा था।
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संस्कृति यूनिवर्सिटी के हेड कार्पोरेट रिलेशन आरके शर्मा का कहना है कि, सिविल इंजीनियरिंग के 63, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 84, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के 41, कम्प्यूटर साइंस के 28, फैशन डिजाइनिंग के 31, बीबीए के 22 तथा एमबीए के 27 छात्र-छात्राएं देश की सुप्रसिद्ध कंपनियों से प्रशिक्षण हासिल कर लौट आएं हैं। 

 
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प्रतिभा को निखारने का अवसर मिला

छात्र-छात्राओं का कहना है कि समर ट्रेनिंग के दौरान हम लोगों को अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिला। इसके साथ ही बड़ी कंपनियों की लेटेस्ट टेक्निक और उनकी कार्यप्रणाली को करीब से देखने का सुहनरा मौका मिला। संस्कृति यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर  राजेश गुप्ता ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि ,उन्होंने समर ट्रेनिंग में जो कुछ सीखा है, उस पर निरंतर अभ्यास करते रहें, ताकि शिक्षा पूरी करने से पहले वे किसी न किसी बड़ी कंपनी में करियर बना सकें। 

राजेश गुप्ता ने कहा कि यूनिवर्सिटी मौजूदा सेशन में इन छात्र-छात्राओं को निरंतर औद्योगिक भ्रमण के लिए भेजेगी। संस्थान के कार्यकारी निदेशक पीसी छाबड़ा ने छात्र-छात्राओं से कहा कि, टेक्निकल एजुकेशन में सिर्फ किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता, इसके लिए कंपनियों की कार्यप्रणाली को देखना और समझना भी बहुत जरूरी है। 

कुलपति डॉ. राणा सिंह का कहना है कि, संस्कृति यूनिवर्सिटी युवा पीढ़ी को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में दक्ष करने के लिए न केवल लेटेस्ट टेक्नीक को प्रमुखता दे रही है बल्कि उसका प्रयास हैं कि यहां अध्ययन करने वाला हर छात्र बड़ी-बड़ी कंपनियों की जरूरतों और उसकी कार्यप्रणाली से भी समय-समय पर रूबरू होता रहे।

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