संस्कृति विश्वविद्यालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन दर्शन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। नेताजी की 75 दुर्लभ तस्वीरों को इस प्रदर्शनी में लगाया गया। नेताजी के बचपन से लेकर आजाद हिंद फौज की स्थापना और उसके बाद की तस्वीरें प्रदर्शनी के आकर्षण का केंद्र रहीं। महिला सैनिक टुकड़ी और बाल टुकड़ियों की बरसों पुरानी तस्वीरें छात्र बेहद उत्साहित दिखे। कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने कहा कि नेताजी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने विदेश में होने वाली आईसीएस (वर्तमान में आईएएस) के समकक्ष परीक्षा पास की, लेकिन अंग्रेजों की नौकरी स्वीकार नहीं की। वह इस परीक्षा को पास करने वाले पहले भारतीय थे। महात्मा गांधी से वैचारिक मतभेद होने के बाद उन्होंने अपने तरीके से आजादी की जंग लड़ने की ठानी और विदेशी धरती पर अच्छी खासी फौज खड़ी कर अंग्रेजों पर भारत छोड़ने के लिए दबाव बनाया। उप कुलाधिपति राजेश गुप्ता ने कहा कि इस तरह की चित्र प्रदर्शनी आसानी से देखने को नहीं मिलती। चित्रों के माध्यम से चंद पल में किसी भी व्यक्ति के पूरे जीवन का दर्शन हो जाता है। ओएसडी मीनाक्षी शर्मा ने सभी बच्चों से मंगलवार को प्रदर्शनी का अवलोकन करने को कहा ताकि वह नेताजी के विषय में विस्तार ने जान सकें। कुलपति डा. राणा सिंह ने प्रदर्शनी को लोकार्पित करते हुए कहा कि नेताजी ने सेना में महिलाओं की भर्ती के अलावा बाल टुकड़ी का प्रयोग अंग्रेजों के खिलाफ किया। उप कुलपति डॉक्टर अभय कुमार ने कहा क नेताजी जब हिटलर से मिलने जाते थे तो वह भी उन्हें सम्मान के साथ सेल्यूट मारते थे। प्रदर्शनी की व्यवस्थाओं में प्रशासनिक अधिकारी अवनीश सिंह का सहयोग रहा। प्रदर्शनी का अवलोकन मंगलवार को भी विवि सभागार में बच्चे कर सकेंगे।
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