उत्तर प्रदेश की जानी-मानी संस्कृति यूनिवर्सिटी और केरल के शांतिगिरी आश्रम (चैरिटेबल ट्रस्ट्र और आध्यात्मिक संगठन) के बीच बेहद अहम करार हुआ है। मकसद है कि उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन में हजारों वर्ष पुराने आयुर्वेद का उजाला भरना। शांतिगिरी आश्रम मथुरा और आसपास के इलाकों में संस्कृति यूनिवर्सिटी की मदद से फ्री मेडिकल कैंप लगाएगा। इससे न केवल रोगियों को आयुर्वेद का लाभ मिलेगा बल्कि संस्कृति यूनिवर्सिटी के बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेद एंड मेडिसिन सर्जरी) के छात्रों को भी काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
शांतिगिरी आश्रम और संस्कृति यूनिवर्सिटी के साथ आने के पीछे सबसे अहम मकसद उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में इलाज से वंचित लोगों को उपचार उपलब्ध कराना है। शांतिगिरी आश्रम आयुर्वेद का लाभ ग्रामीण उत्तर भारत में जन-जन तक पहुंचाना चाहता है, इसी वजह से संस्थान ने संस्कृति यूनिवर्सिटी की मदद ली है। शांतिगिरी आश्रम इस मकसद के लिए राज्य और केंद्र सरकार की मदद से गांव गोद लेने का प्रोग्राम भी शुरू करने जा रहा है। इस कार्य में आश्रम को संस्कृति यूनिवर्सिटी से भी काफी उम्मीदें हैं।
शांतिगिरी आश्रम के विशेषज्ञों को आयुर्वेद के क्षेत्र में महारत हासिल है। हजारों वर्ष पुरानी आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति भले ही उत्तर भारत में आज उस स्तर पर प्रचलन में नहीं है, लेकिन दक्षिण भारत में आज भी यह चलन में है। खासतौर पर केरल, जो कि हजारों साल से नैचुरल मेडिसिन के लिए जाना जाता है। ऐसे में केरल के शांतिगिरी आश्रम के पास मौजूद आयुर्वेद का खजना संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए काफी लाभप्रद साबित होगा।
आयुर्वेद की आठ शाखाएं -
1- काया चिकित्सा (General Medicine)
2-बाल रोग चिकित्सा (Paediatrics)
3-गृह चिकित्सा (Treatment for evil spirits)
4- उर्दवंग तंत्र (E.N.T & Ophthalmology)
5- शल्य चिकित्सा ( Surgery)
6-विष चिकित्सा (Toxicology)
7- रसायन चिकित्सा (Rejuvenation Therapy)
8-वाजीकरण चिकित्सा (Aphrodisiacs)
आयुर्वेद के इन आठों भागों में मानव जीवन का समस्त समाधान है। संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्रों को शांतिगिरी आश्रम की मदद से इन सभी का ज्ञान प्राप्त करने में काफी मदद प्राप्त होगी।
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