वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ समझौता
19 अक्तूबर को जारी एक बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी भारत और रूस के छात्रों और विद्वानों के लिए नए क्षितिज खोलेगी तथा शिक्षा, संस्कृति और मानविकी में द्विपक्षीय सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाएगी।"
अधिकारियों ने कहा कि सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर भारत और रूस के बीच शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह बैठक दोनों पक्षों के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में काल्मिक स्टेट यूनिवर्सिटी में आयोजित की गई, जिसमें रूसी संघ में भारतीय दूतावास के पूर्णाधिकारी मंत्री निखिलेश चंद्र गिरि, भारतीय दूतावास में शिक्षा मंत्री विनय कुमार और नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी (जो वीडियो लिंक के माध्यम से बैठक में शामिल हुए) शामिल थे।
काल्मिकिया में साझा शिक्षा और संस्कृति पर जोर
इस अवसर पर काल्मिकिया क्षेत्रीय सरकार के उपाध्यक्ष अलेक्सी एतेयेव और काल्मिक स्टेट यूनिवर्सिटी के रेक्टर बदमा सालायेव भी उपस्थित थे।
सालायेव ने इस साझेदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय राजनयिकों और शैक्षणिक प्रतिनिधियों की यात्रा "शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को गहरा करने में एक नया अध्याय" है।
उन्होंने कहा कि काल्मिकिया में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की हाल ही में आयोजित प्रदर्शनी का गहरा प्रतीकात्मक महत्व है, जो अंतरधार्मिक और अंतरसांस्कृतिक संवाद को और मजबूत करेगा।
53 देशों के छात्रों को शिक्षा देती है कलमीक स्टेट यूनिवर्सिटी
अधिकारियों ने बताया कि ये अवशेष दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखे गए थे और रूसी शहर एलिस्टा में प्रदर्शनी के बाद अब भारत लौट आए हैं।
बयान में कहा गया है कि सलायेव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कलमीक स्टेट यूनिवर्सिटी 23 देशों के विश्वविद्यालयों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करती है और 53 देशों के लगभग 1,500 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को शिक्षा प्रदान करती है, जिनमें 50 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी विश्वविद्यालय के लिए "सर्वोच्च प्राथमिकता" बनी हुई है।