लॉटरी के माध्यम से हुआ था स्कूल आवंटन
राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक श्री हरजिंदर सिंह ने जानकारी दी कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12 (1) (ग) के तहत कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में प्रवेश देने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसी क्रम में 2 अप्रैल 2026 को ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न निजी स्कूलों में सीट आवंटित की गई थी।
इसके बाद अभिभावकों को 3 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच अपने बच्चों का प्रवेश संबंधित स्कूलों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इस अवधि में जिन अभिभावकों ने प्रवेश नहीं कराया, उन्हें एसएमएस के जरिए भी सूचित किया गया था।
अभिभावकों की मांग पर लिया गया निर्णय
हालांकि, निर्धारित समय सीमा के दौरान अधिकांश छात्रों का प्रवेश हो गया, लेकिन कुछ अभिभावकों ने विभिन्न कारणों से समय पर प्रवेश नहीं करा पाने की जानकारी दी। उन्होंने प्रशासन से समय सीमा बढ़ाने की मांग की, ताकि वे अपने बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित कर सकें।
अभिभावकों की इस मांग और बच्चों के हितों को प्राथमिकता देते हुए राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रवेश की अंतिम तिथि को 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब पहले चरण में चयनित विद्यार्थी 25 अप्रैल 2026 तक अपने आवंटित विद्यालय में प्रवेश ले सकते हैं।
निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती
राज्य शिक्षा केंद्र ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। यदि किसी भी अभिभावक द्वारा यह शिकायत मिलती है कि उनके बच्चे को आवंटित निजी स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
विकासखंड स्त्रोत समन्वयक (BRC) और जिला परियोजना समन्वयक (DPC) को ऐसे मामलों में तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित बच्चे को उसके आवंटित विद्यालय में प्रवेश अवश्य मिले।
दैनिक समीक्षा से होगी निगरानी
पूरी प्रक्रिया की निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने के लिए जिला स्तर पर रोजाना समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र बच्चा इस योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।