फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bombay HC: छात्रों में आत्महत्या की बढ़ती दर पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता; अधिकारियों से तत्काल उपाय करने को कहा

Tue, 30 Jul 2024 09:37 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Bombay HC: उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों में आत्महत्या की बढ़ती दर को "चिंताजनक" बताते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अधिकारियों से तत्काल उपाय करने का आह्वान किया।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Bombay HC: बॉम्बे हाई कोर्ट में बाल अधिकार कार्यकर्ता शोभा पंचमुख द्वारा छात्रों में आत्महत्या की बढ़ती दर पर चिंता व्यक्त करते हुए एक याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों में आत्महत्या की बढ़ती दर को "चिंताजनक" बताते हुए अधिकारियों से इसका तत्काल उपाय करने का आह्वान किया। 

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने यह भी कहा कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक छात्र का अभिन्न अंग है।

इस याचिका में उच्च न्यायालय से मुंबई विश्वविद्यालय (एमयू) को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से निपटने के लिए परामर्शदाताओं को शामिल करने के लिए सभी संबद्ध/संबद्ध कॉलेजों को एक परिपत्र जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था। इस जनहित याचिका में उच्च शिक्षा प्राप्त छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिए अपर्याप्त उपायों पर प्रकाश डाला गया।

पीठ ने कहा, "ऐसी स्थिति चिंताजनक है और सभी संबंधित पक्षों द्वारा तत्काल उपाय किए जाने की आवश्यकता है। महाराष्ट्र विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों में स्वस्थ माहौल को बढ़ावा देने और छात्रों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय कानूनी रूप से बाध्य हैं।"
विज्ञापन


पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह याचिका में प्रतिवादी के रूप में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को शामिल करे, क्योंकि कई कॉलेज अब स्वायत्त हो रहे हैं। उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार, एमयू और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें