कुछ नया जानने की इच्छा
बातचीत से पहले अपनी सोच को पहचानने की प्रक्रिया को क्यूरियोसिटी कर्व या जिज्ञासा वक्र कहते हैं। इसमें यह देखना होता है कि क्या आप पुराने ढरें की तैयारी के साथ बातचीत में शामिल हो रहे हैं या सच में कुछ नया जानने को तैयार हैं? यह पत्ता लगाने का सबसे अच्छा तरीका खुद से कुछ सवाल पूछना है, जैसे कि अगर मुझे असहमति का सामना करना पड़े, तो क्या मैं उसे खुले दिल से स्वीकार करूंगा या नकारूंगा? या क्या मैं दूसरे की बातों को अनदेखा कर रहा हूं? आदि।
सतर्कता भी है जरूरी
अब जब आप समझ गए कि आपकी शुरुआती मानसिक स्थिति क्या है, तो तय कीजिए कि आप आगे किस सोच को अपनाना चाहते हैं। अगर आप अंदर ही अंदर विरोध या शक से शुरुआत कर रहे हैं, तो आपको थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे में, अपनी सोच को ऐसी दिशा में ले जाएं, जिसमें आपको सहजता महसूस हो।
सही स्थिति का अंदाजा लगाएं
बातचीत से पहले खुद से छोटे-छोटे सवाल करें। आप खुद से पूछ सकते हैं कि क्या सामने वाले व्यक्ति की कोई ऐसी समस्या है, जो मुझे नहीं पता? या कहीं मेरी बातों या व्यवहार से उन्हें कुछ ऐसा तो महसूस नहीं हो रहा, जो मेरा इरादा नहीं था?, क्या मैं किसी बात को लेकर गलत धारणाएं बनाए हुए हूं? हो सकता है वो कुछ ऐसा जानते हों, जो मुझे अभी पता नहीं? आदि। इससे आपको सही स्थिति का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।