Harvard Business Review: अक्सर देखा गया है कि कई पेशेवर बिना मानसिक रूप से तैयार हुए ऑफिस में किसी जरूरी बातचीत, प्रोजेक्ट की समीक्षा, बड़े फैसले लेने या महत्वपूर्ण बैठकें करने जैसे काम कर लेते हैं। इससे न सिर्फ उनका प्रदर्शन, बल्कि दूसरों के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वे रोजाना के कामों की तरह ही मीटिंग में शामिल हो जाते हैं तथा इसके लिए अतिरिक्त जिज्ञासा और उत्साह नहीं दिखाते। जब आप जिज्ञासा और उत्साह के साथ मीटिंग, चर्चा या किसी प्रोजेक्ट की समीक्षा में जाते हैं, तो चीजों को खुले दिमाग से देखते हैं, दूसरों के नजरिए को समझ पाते हैं और समस्या का रचनात्मक समाधान ढूंढ सकते हैं।
कई पेशेवर अक्सर बातचीत से पहले अपने जवाब, तर्क या संभावित सवालों की तैयारी तो करते हैं, लेकिन यह तैयारी उन्हें अपनी ही बातों तक सीमित कर देती है। अगर आप सच में कुछ नया जानना चाहते हैं, तो खुद से कुछ सवाल करें, जैसे-क्या मैं कहीं गलती या चूक कर रहा हूं? जिज्ञासा आपको ज्यादा सोचने और दिमाग को पूरी क्षमता के साथ काम करने में मदद करती है। साथ ही, इससे आप नई जानकारी समझ सकते हैं और जटिल समस्याओं को बेहतर तरीके से हल कर सकते हैं।