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Review: जिज्ञासा और उत्साह से बढ़ती है कार्यक्षमता! ऑफिस मीटिंग को बनाएं सीखने का अवसर; सीखें सफलता के सूत्र

Thu, 24 Jul 2025 12:23 PM IST
शिवम गर्ग जेफ वेट्जलर, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Workplace Enthusiasm: क्या आप मीटिंग या प्रोजेक्ट की शुरुआत सिर्फ औपचारिकता के रूप में करते हैं? हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के जेफ वेट्जलर बताते हैं कि जिज्ञासा और उत्साह से कार्यक्षमता कैसे बढ़ती है और समाधान अधिक रचनात्मक बनते हैं।
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दफ्तर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Harvard Business Review: अक्सर देखा गया है कि कई पेशेवर बिना मानसिक रूप से तैयार हुए ऑफिस में किसी जरूरी बातचीत, प्रोजेक्ट की समीक्षा, बड़े फैसले लेने या महत्वपूर्ण बैठकें करने जैसे काम कर लेते हैं। इससे न सिर्फ उनका प्रदर्शन, बल्कि दूसरों के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वे रोजाना के कामों की तरह ही मीटिंग में शामिल हो जाते हैं तथा इसके लिए अतिरिक्त जिज्ञासा और उत्साह नहीं दिखाते। जब आप जिज्ञासा और उत्साह के साथ मीटिंग, चर्चा या किसी प्रोजेक्ट की समीक्षा में जाते हैं, तो चीजों को खुले दिमाग से देखते हैं, दूसरों के नजरिए को समझ पाते हैं और समस्या का रचनात्मक समाधान ढूंढ सकते हैं।

खुद से सवाल करें

कई पेशेवर अक्सर बातचीत से पहले अपने जवाब, तर्क या संभावित सवालों की तैयारी तो करते हैं, लेकिन यह तैयारी उन्हें अपनी ही बातों तक सीमित कर देती है। अगर आप सच में कुछ नया जानना चाहते हैं, तो खुद से कुछ सवाल करें, जैसे-क्या मैं कहीं गलती या चूक कर रहा हूं? जिज्ञासा आपको ज्यादा सोचने और दिमाग को पूरी क्षमता के साथ काम करने में मदद करती है। साथ ही, इससे आप नई जानकारी समझ सकते हैं और जटिल समस्याओं को बेहतर तरीके से हल कर सकते हैं।

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कुछ नया जानने की इच्छा

बातचीत से पहले अपनी सोच को पहचानने की प्रक्रिया को क्यूरियोसिटी कर्व या जिज्ञासा वक्र कहते हैं। इसमें यह देखना होता है कि क्या आप पुराने ढरें की तैयारी के साथ बातचीत में शामिल हो रहे हैं या सच में कुछ नया जानने को तैयार हैं? यह पत्ता लगाने का सबसे अच्छा तरीका खुद से कुछ सवाल पूछना है, जैसे कि अगर मुझे असहमति का सामना करना पड़े, तो क्या मैं उसे खुले दिल से स्वीकार करूंगा या नकारूंगा? या क्या मैं दूसरे की बातों को अनदेखा कर रहा हूं? आदि।

सतर्कता भी है जरूरी

अब जब आप समझ गए कि आपकी शुरुआती मानसिक स्थिति क्या है, तो तय कीजिए कि आप आगे किस सोच को अपनाना चाहते हैं। अगर आप अंदर ही अंदर विरोध या शक से शुरुआत कर रहे हैं, तो आपको थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे में, अपनी सोच को ऐसी दिशा में ले जाएं, जिसमें आपको सहजता महसूस हो।

सही स्थिति का अंदाजा लगाएं

बातचीत से पहले खुद से छोटे-छोटे सवाल करें। आप खुद से पूछ सकते हैं कि क्या सामने वाले व्यक्ति की कोई ऐसी समस्या है, जो मुझे नहीं पता? या कहीं मेरी बातों या व्यवहार से उन्हें कुछ ऐसा तो महसूस नहीं हो रहा, जो मेरा इरादा नहीं था?, क्या मैं किसी बात को लेकर गलत धारणाएं बनाए हुए हूं? हो सकता है वो कुछ ऐसा जानते हों, जो मुझे अभी पता नहीं? आदि। इससे आपको सही स्थिति का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।
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