सीखने और समझने में बाधक बन रहा दुलार
यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया की समाजशास्त्री डॉ. एनेट लारेउ के अनुसार, इस मॉडल से छात्र खुद पर भरोसा करना और साथी दोस्तों से रिश्ते बनाना नहीं सीख पाते। प्रोफेसर लैरी नेल्सन का कहना है, माता-पिता का कभी-कभार केयर पैकेज भेजना समझ आता है, लेकिन जब आप बच्चे के कपड़े धोने और सफाई जैसे बुनियादी काम भी दूसरों से कराने लगते हैं, तो आप उन्हें व्यावहारिक रूप से पंगु बना रहे हैं। वे कभी वयस्क नहीं बन पाएंगे।
पेरेंटिंग का तरीका पूरी तरह बदला
कैंपस मॉम की सह-संस्थापक मोंटेने लॉन्ग का कहना है कि आज के अभिभावक अपने बच्चों से 24 घंटे जुड़े रहना चाहते हैं। 1998 में कॉलेज जाने वाले छात्र पूरी तरह आत्मनिर्भर होते थे, वहीं आज माता-पिता अपने प्रतिनिधि के रूप में इन लोकल मॉम्स को तैनात कर रहे हैं।
यह खाना डिलीवर करने जैसी सामान्य सेवा नहीं है। यह मुझे तसल्ली देती है कि दूर रहने के बावजूद कोई मेरे बच्चे की देखभाल कर रहा है। यह भावनात्मक सरोगेसी है।
-हामिद हैदरी, सेवा का उपयोग कर रहे एक अभिभावक