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Kerala: स्कूल का समय बढ़ाने पर सुन्नी संगठन का विरोध, कहा - 'मदरसा शिक्षा प्रभावित होगी', मंत्री ने दी ये सलाह

Thu, 10 Jul 2025 07:39 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Kerala: स्कूलों का समय 30 मिनट बढ़ाने से मदरसा शिक्षा प्रभावित होगी, मंत्री मंत्री शिवनकुट्टी ने कहा धार्मिक संगठनों को शिक्षा से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की सलाह दी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को दिक्कत है तो वह कानूनी रास्ता अपना सकता है।
 
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केरल के शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी - फोटो : एएनआई फाइल फोटो
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विस्तार
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Thiruvananthapuram: केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने गुरुवार को स्पष्ट रूप से कहा कि धार्मिक संगठनों को शिक्षा से जुड़े मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उनका यह बयान उस वक्त आया है जब यह खबरें सामने आई हैं कि एक प्रमुख सुन्नी विद्वानों का संगठन स्कूल के समय में हाल ही में किए गए बदलाव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहा है।

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स्कूल का समय बढ़ाने से छात्रों की मदरसा शिक्षा प्रभावित होगी: समस्था

केरल के मुसलमानों के बीच सबसे बड़ा समर्थन आधार रखने वाले एक प्रभावशाली सुन्नी संगठन समस्था केरल जेम-इय्यथुल उलेमा ने राज्य सरकार द्वारा स्कूल का समय 30 मिनट बढ़ाने के फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। समस्था ने चिंता जताई है कि बदला हुआ समय करीब 12 लाख छात्रों की मदरसा शिक्षा को प्रभावित कर सकता है।

स्कूल के समय में बदलाव पर पुनर्विचार होना चाहिए: नसर फैज़ी कूडथाई

समस्था केरल जम-इय्यथुल कुतबा कमेटी के एक प्रमुख नेता नसर फैज़ी कूडथाई ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं के बीच भी व्यापक सहमति है कि स्कूल के समय में बदलाव पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने भी इस विषय पर चर्चा की मांग की है।

कूडथाई ने आगे आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों में जेंडर न्यूट्रैलिटी जैसी "धर्मविरोधी" अवधारणाएं लाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले मुस्लिम संगठनों को आश्वासन दिया था कि जेंडर न्यूट्रैलिटी को पाठ्यपुस्तकों में शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन अब यह विषय कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया गया है, जिसे उन्होंने धार्मिक संगठनों को दिए गए आश्वासन का उल्लंघन बताया।

किसी विशेष वर्ग के लिए बदला नहीं जा सकता स्कूल का समय: शिवनकुट्टी

इसी विषय पर एक टीवी चैनल से बात करते हुए मंत्री शिवनकुट्टी ने स्पष्ट किया कि परीक्षा कार्यक्रम या स्कूल का समय किसी विशेष वर्ग के लिए बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “ऐसे निर्णय एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार नहीं ले सकती।”

मंत्री ने स्कूल समय में बदलाव को वापस लेने की मांग को “अलोकतांत्रिक” करार दिया और कहा कि इसमें “धमकी भरा लहजा” है, जो सरकार के लिए सीधा चुनौतीपूर्ण है। 

उन्होंने कहा, “कई संगठन इस प्रकार की मांग कर रहे हैं। अगर हम सभी की मांगों को मानने लगें, तो स्कूलों का संचालन असंभव हो जाएगा। धार्मिक संगठनों को शैक्षणिक क्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। ऐसा हस्तक्षेप किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।”

उन्होंने इस विषय पर और चर्चा की जरूरत से इनकार करते हुए कहा कि यह निर्णय 30-35 लाख छात्रों की शिक्षा से संबंधित है और यह उनके हित में लिया गया है।
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किसी को दिक्कत है तो कानूनी रास्ता अपनाएं: मंत्री

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सुबह और दोपहर के सत्र में 15-15 मिनट की जो अतिरिक्त कक्षाएं जोड़ी गई हैं, वह न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई हैं। उन्होंने विरोध करने वालों से कहा कि यदि उन्हें आपत्ति है तो वे कानूनी रास्ता अपनाएं।

उन्होंने बताया कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा पंचांग और राज्य के नियमों के अनुसार 220 शिक्षण दिवसों के बराबर निर्धारित शिक्षण समय पूरा करने के लिए लिया गया है, जिसमें महीने के 16 दिनों में स्कूल के समय में वृद्धि की गई है और शुक्रवार को यह बदलाव लागू नहीं है।
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