जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पॅालिटेक्निक डिपार्टमेंट से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए राहत की खबर है। उनका पॉलिटेक्निक डिप्लोमा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से पूरी तरह से मान्य है। एआईसीटीई ने जामिया प्रशासन और छात्रों से कहा है कि संसद के अधिनियम से बनी यूनिवर्सिटी को अपने कैंपस में ऐसे कोर्स चलाने के लिए मंजूरी की जरूरत नहीं है। इसलिए वे चिंता छोड़कर पढ़ाई पर फोकस करें।
जामिया के छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत दी कि उनका पॉलिटेक्निक डिप्लोमा एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त नहीं है। इसलिए योग्यता पूरी करने के बाद भी उन्हें सरकारी नौकरी में तवज्जो नहीं मिल रही है। छात्रों की शिकायत पर जामिया प्रशासन ने फरवरी 2021 में अपने पुराने कागजात जांचे तो पता चला कि उनके पॉलिटेक्निक कोर्स की मंजूरी तो 2012 में ही पूरी हो चुकी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विशेषज्ञों से राय लिए बिना ही छात्रों की शिकायत और कागजात के आधार पर एआईसीटीई से मंजूरी मांग ली। इस पॉलिटेक्निक डिपार्टमेंट में सिविल इंजीनियरिंग, मेकैनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स कराए जाते हैं।
जामिया लिखित मंजूरी पर अड़ा
एआईसीटीई ने मांग पत्र देखा तो जामिया प्रशासन से कहा कि उनका यह डिप्लोमा कोर्स पूरी तरह से मान्य है। उसके लिए अलग से मंजूरी की जरूरत नहीं है। एआईसीटीई के नियम को दर-किनार करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन अड़ गया है कि उन्हें तो लिखित मंजूरी चाहिए। इसलिए अब एआईसीटीई विश्वविद्यालय की मांग पर लिखित में देने जा रहा है कि उनका डिप्लोमा मान्य है।
सभी डिप्लोमा को मंजूरी दिलाएंगे
पूर्व छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी समस्याएं बताई हैं। इस पर दोबारा एआईसीटीई के पास सभी दस्तावेज जमा करवा दिये गए हैं, ताकि दोबारा पॉलिटेक्निक डिपार्टमेंट को डिप्लोमा कोर्स की पढ़ाई की मंजूरी मिल सके। पिछले वर्षों में ऐसा क्यों हुआ है, उसकी जानकारी मुझे नहीं है। मैं विश्वास दिलाता हूं कि सभी का डिप्लोमा मान्य होगा।
- प्रो. नाजिम हुसैन अल जाफरी, रजिस्ट्रार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया
अलग से मंजूरी की जरूरत नहीं
जामिया प्रशासन ने पॉलिटेक्निक डिपार्टमेंट के लिए मंजूरी मांगी है। इसलिए अब दोबारा मंजूरी दे देंगे। जबकि जामिया ने डिप्लोमा शुरू करने के दौरान पहले मंजूरी ली थी। किसी भी विश्वविद्यालय को अपने कैंपस में ऐसी पढ़ाई के लिए मंजूरी की जरूरत नहीं होती है। अब तक जामिया के इस डिपार्टमेंट से जितने भी छात्रों ने डिप्लोमा किया है, वह मान्य है। डिप्लोमा मान्य नहीं है, कहकर कोई नौकरी से इनकार नहीं कर सकता है। इनकार का अन्य कारण रहा होगा।
- प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे, चेयरमैन, एआईसीटीई।