केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से बारहवीं के रिजल्ट तैयार करने के लिए मूल्यांकन नीति जारी की जा चुकी है जिसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस बार दाखिले कट ऑफ पर होंगे या फिर सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट केआधार पर, यह अभी तय नहीं है। लेकिन कॉमन एंट्रेस टेस्ट को लेकर छात्रों व शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया है। छात्र इस बार दाखिले कट ऑफ से ही करने के पक्ष में है। छात्रों का तर्क है कि किसी भी परीक्षा को पास करने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। साथ ही कॉमन एंट्रेस टेस्ट के संबंध में पहले से बताया नहीं गया है।
वहीं शिक्षकों का कहना है कि प्रवेश परीक्षा सभी छात्रों के हित में नहीं है। शिक्षकों के पास छात्रों की ओर से मेल भेजे गए हैं। जिसमें वह सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट का विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि यह सभी छात्रों के हित में नहीं है। डीयू के पूर्व कार्यकारी परिषद सदस्य व शिक्षक डॉ राजेश झा की ओर से इन आपत्तियों को कुलपति व डीन स्टूडेंट वेलफेयर को भेजा गया है। जिससे कि कोई भी नीति बनाते समय छात्रों की इन आपत्तियों को भी ध्यान में रखा जा सके।
छात्रों का विरोध इस बात को लेकर है कि किसी भी परीक्षा को लेकर उसकी जानकारी पहले दी जाती है। जबकि इस कॉमन एंट्रेस टेस्ट केपाठ्यक्रम, पैटर्न, तिथि, समय और माध्यम की जानकारी पहले नहीं दी गई। छात्रों का कहना है कि डीयू में कई वोकेशनल कोर्स भी हैं। इन पाठ्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश देने के लिए इस एंट्रेस टेस्ट को कैसे डिजाइन किया जाएगा, यह एक बड़ा सवाल है। वहीं डीयू विदेशी भाषाओं में भी कोर्स कराता है।
इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश योग्यता के आधार पर होते हैं। अब ऐसे समय में प्रवेश की प्रक्रिया को बदलने से निश्चित रूप से छात्रों को नुकसान होगा। वहीं शैक्षणिक कैलेंडर में पहले ही देरी हो चुकी है। कॉमन एंट्रेस टेस्ट आयोजित करने से और देरी होगी और संभवत: दिसंबर या जनवरी में कक्षाएं शुरु हो सकेंगी, जिससे छात्रों पर और दबाव पड़ेगा
कॉमन एंट्रेस टेस्ट होने पर वहीं छात्र अपनी तैयारी कर पाएंगे जिनकेपास ऑनलाइन भुगतान करके कोर्सेज करने की पहुंच हैं। यदि समय पर परीक्षा की घोषणा हो जाती तो ठीक रहता। लेकिन इस स्तर पर जब अधिकांश लोगों को कॉमन एंट्रेस टेस्ट के बारे में पता भी नहीं है। ऐसे में छात्र इस साल के लिए कट ऑफ सिस्टम को ही सही बता रहे हैं। डीयू के पूर्व कार्यकारी परिषद सदस्य डॉ राजेश झा का कहना है कि पाठ्यक्रम व पेपर पैटर्न की जानकारी दिए बिना प्रवेश परीक्षा शुरु करना उन छात्रों केलिए कठिन हो सकता है जिनकेपास सीखने की सामग्री की पहुंच नहीं है।
एंट्रेस टेस्ट को लेकर अभी नहीं हुआ फैसला
बीते साल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी) 2020 के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेस टेस्ट के तौर-तरीकों पर गौर करने केलिए एक कमेटी का गठन किया था। समिति अपनी रिपोर्ट दे चुकी है। अब मंत्रालय को फैसला लेना है कि इसे इस साल लागू किया जाएगा या नहीं। मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद ही एंट्रेस टेस्ट लागू किया जा सकेगा।