क्या होता है पूर्ण राज्य का दर्जा?
पूर्ण राज्य का दर्जा किसी प्रदेश को पूरा राज्य बनाने का अधिकार होता है। इसका मतलब है कि उस प्रदेश की अपनी विधान सभा, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार होती है, जो अपने राज्य के नियम और फैसले खुद बनाती है। राज्य अपने ज्यादातर काम खुद करता है और केंद्र सरकार केवल कुछ मामलों में मदद या नियंत्रण करती है।
उदाहरण के लिए, भारत के 28 राज्य पूर्ण राज्य का दर्जा रखते हैं, जबकि केंद्र शासित प्रदेश जैसे लद्दाख और दिल्ली पर सीधा केंद्र सरकार का नियंत्रण होता है और उन्हें यह पूरा अधिकार नहीं मिलता।
पूर्ण राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में अंतर
पूर्ण राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में मुख्य फर्क उनके सशक्त शासन और अधिकार में है। पूर्ण राज्य के पास अपनी विधानसभा, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार होती है, जो राज्य के नियम, कानून और फैसले खुद बनाती और लागू करती है। राज्य अपने ज्यादातर मामलों में स्वतंत्र होता है और केंद्र सरकार केवल कुछ मामलों में ही हस्तक्षेप करती है।
केंद्र शासित प्रदेश पर मुख्य रूप से केंद्र सरकार का नियंत्रण होता है। इसे राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक चलाते हैं और अधिकांश फैसले केंद्र सरकार तय करती है। कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा होती है, लेकिन वे अपने फैसलों में पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं होते।