सम्मेलन में लगेगी पांडुलिपियों की प्रदर्शनी
सम्मेलन स्थल पर दुर्लभ पांडुलिपियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। साथ ही पांडुलिपि संरक्षण, डिजिटलीकरण तकनीक, मेटाडाटा मानक, कानूनी ढांचे, सांस्कृतिक कूटनीति और प्राचीन लिपियों के पाठ-वाचन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विद्वानों द्वारा प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।
संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहा कि भारत इस समय “सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर” से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य देश की पांडुलिपि धरोहर को संरक्षित करना है।
पांडुलिपियों के संरक्षण की दिशा में पहल
इस सम्मेलन का लक्ष्य भारत की सभी पांडुलिपियों के संरक्षकों को एक मंच पर लाकर ऐसा राष्ट्रीय तंत्र तैयार करना है, जिससे उनका संरक्षण और ज्ञान का प्रसार सुनिश्चित हो सके। यह कार्य ज्ञान भारतम परियोजना के तहत किया जाएगा।
भारत दुनिया में प्राचीन पांडुलिपियों का सबसे समृद्ध भंडार रखता है। यहां लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें देश की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और सांस्कृतिक धरोहर का खजाना समाहित है।
सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के तहत ज्ञान भारतम मिशन को एक प्रमुख पहल के रूप में शुरू किया है। इस मिशन के अंतर्गत देशभर के शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में सुरक्षित पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण, संरक्षण, डिजिटलीकरण और सार्वजनिक पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।