तय डाइट से ज्यादा जरूरी सही सोच
पीएम मोदी ने कहा कि उनके जीवन में लंबे समय तक कोई तय डाइट सिस्टम नहीं रहा। अलग-अलग जगहों की यात्राओं के दौरान जो भोजन उपलब्ध होता था, वही खा लेते थे। कई बार खुद खाना भी बनाना पड़ता था और खिचड़ी जैसे साधारण भोजन से ही काम चलाना पड़ता था। उन्होंने बताया कि भोजन को दवा की तरह समझकर लेना चाहिए और जरूरत के हिसाब से संतुलन बनाना चाहिए।
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पेट भरकर या मन भरकर?
प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि हर व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि वह पेट भरकर खाना चाहता है या सिर्फ स्वाद के लिए। ज्यादा खाने की आदत से बचने और शरीर की जरूरत के अनुसार भोजन लेने पर उन्होंने जोर दिया। उनका कहना था कि खान-पान में अनुशासन रखने से शरीर और दिमाग दोनों बेहतर तरीके से काम करते हैं।
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दिनचर्या में शामिल करें अच्छी आदतें
पीएम मोदी ने स्वस्थ जीवन के लिए कुछ सरल आदतें अपनाने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि सुबह जल्दी उठना, सूर्योदय देखना और गहरी सांस लेने की आदत शरीर को ऊर्जा देती है। उनके अनुसार, कई लोग अपने शरीर को सबसे आखिरी प्राथमिकता देते हैं, जबकि अच्छी सेहत पढ़ाई और जीवन दोनों के लिए जरूरी है।
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छात्रों के लिए क्या है संदेश
इस सत्र के दौरान पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ अपनी दिनचर्या, खान-पान और नींद का भी ध्यान रखें। नियमित और संतुलित जीवनशैली अपनाने से तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। उन्होंने छात्रों को छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की सलाह दी।