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कौन हैं पवन चंदना: टाइम100 पत्रिका में मिली जगह, आईआईटी खड़गपुर से की कौन सी पढ़ाई? जानें उपलब्धियां

Sat, 03 Oct 2026 02:09 PM IST
शिवम तिवारी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Pawan Kumar Chandana: आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना को टाइम 100 नेक्स्ट 2026 में शामिल किया गया है। यह सम्मान विक्रम-1 की सफल उड़ान के बाद मिला, जिसने भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नई उपलब्धि दर्ज की। चंदना पहले इसरो में वैज्ञानिक रह चुके हैं।
 
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IIT खड़गपुर के पवन चंदना का कमाल, ISRO वैज्ञानिक से Rocket Company CEO तक का सफर, TIME100 Next में म - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदना को टाइम की 2026 टाइम 100 नेक्स्ट सूची में जगह मिली है। यह सूची अलग-अलग क्षेत्रों में भविष्य को आकार देने वाले उभरते नेताओं को पहचान देती है। चंदना को यह वैश्विक पहचान स्काईरूट एयरोस्पेस के सफल विक्रम-1 मिशन के बाद मिली है, जिसने भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि दर्ज की।
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18 जुलाई 2026 को विक्रम-1 ने भारतीय धरती से कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचने वाला पहला निजी तौर पर विकसित भारतीय रॉकेट बनने की उपलब्धि हासिल की। इस मिशन के तहत कई पेलोड यानी अंतरिक्ष उपकरणों को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाया गया। रॉकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी।

विक्रम-1 रॉकेट की खासियत क्या है?

विक्रम-1 एक चार-चरणीय कक्षीय प्रक्षेपण यान है, जिसे छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है। इसमें तीन ठोस ईंधन वाले चरण और एक तरल ईंधन वाला ऊपरी चरण शामिल है। इस तकनीक के जरिए स्काईरूट ने भारत में निजी क्षेत्र की रॉकेट निर्माण और प्रक्षेपण क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम रखा है।

पवन चंदना की पढ़ाई कहां से हुई?

पवन कुमार चंदना ने आईआईटी खड़गपुर से यांत्रिक अभियांत्रिकी में दोहरी उपाधि हासिल की। उन्होंने 2012 में अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो में वैज्ञानिक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने के अनुभव ने आगे चलकर उनके उद्यमी बनने की राह तैयार की।

इसरो से स्काईरूट तक कैसे पहुंचे?

इसरो में वैज्ञानिक के रूप में काम करने के बाद पवन चंदना ने स्काईरूट एयरोस्पेस की सह-स्थापना की। उनका सफर एक इसरो अभियंता से निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के उद्यमी और फिर रॉकेट कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तक पहुंचा। उनकी यात्रा ऐसे समय में आगे बढ़ी, जब 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के बाद भारत में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने लगी।

स्काईरूट एयरोस्पेस की शुरुआत कैसे हुई?

स्काईरूट एयरोस्पेस ने निजी तौर पर विकसित रॉकेट तकनीक पर काम शुरू किया। कंपनी का शुरुआती बड़ा कदम विक्रम-एस उपकक्षीय मिशन था, जिसे 18 नवंबर 2022 को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था। विक्रम-एस को कंपनी की निजी रॉकेट तकनीक के प्रौद्योगिकी प्रदर्शनकर्ता के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

आईआईटी खड़गपुर ने क्या कहा?

पवन चंदना को टाइम 100 नेक्स्ट 2026 में शामिल किए जाने पर आईआईटी खड़गपुर ने उन्हें बधाई दी। संस्थान ने इसे अपने लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण बताया और भारतीय नवाचार की वैश्विक मंच पर पहचान के रूप में देखा। संस्थान ने कहा कि चंदना की यात्रा खड़गपुर से अंतरिक्ष और भारत से दुनिया तक पहुंचने की कहानी है।

स्काईरूट एयरोस्पेस ने कैसे दी बधाई?

स्काईरूट एयरोस्पेस ने भी अपने सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी को इस वैश्विक पहचान के लिए बधाई दी। कंपनी ने इसे उनके सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। कंपनी के अनुसार, यह यात्रा उस इसरो अभियंता से शुरू हुई थी, जिसे विश्वास था कि भारत का निजी क्षेत्र भी रॉकेट बना और उसका प्रक्षेपण कर सकता है। विक्रम-1 की सफलता ने इस सोच को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में बदल दिया।
 
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