मानविकी और सामाजिक विज्ञान के लिए MCQ मॉडल पर आपत्ति
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) पर आधारित परीक्षा प्रणाली मानविकी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जा सकती।
रिपोर्ट के अनुसार, ये विषय स्वतंत्र सोच, विश्लेषण और व्यक्तिपरक अभिव्यक्ति पर आधारित होते हैं। ऐसे में केवल MCQ आधारित मूल्यांकन छात्रों की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह नहीं आंक सकता।
NEP 2020 के अनुरूप समीक्षा की सिफारिश
समिति ने सुझाव दिया है कि सीयूईटी के प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और परीक्षा के डिजाइन की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परीक्षा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप हो।
रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि वह विभिन्न विषयों की प्रकृति और आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित कर सके।
जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों की जरूरतें अलग
समिति ने यह भी कहा कि सीयूईटी को एकमात्र प्रवेश परीक्षा बनाने के कुछ फायदे जरूर हैं, लेकिन इससे कुछ विश्वविद्यालयों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई हो सकती है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रणाली सामाजिक, आर्थिक और क्षेत्रीय विविधता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित की गई थी। JNU अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय पर प्रतिनिधित्व और विविधता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
समिति ने कहा कि वह इस विषय पर आगे भी विचार-विमर्श करेगी।
सरकार ने क्या कहा?
समिति की टिप्पणियों पर सरकार ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में कहा है कि इन सुझावों को संज्ञान में लिया गया है। सरकार के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को समिति की टिप्पणियों के बारे में उचित सलाह दी गई है।
सीयूईटी क्यों शुरू किया गया था?
सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सीयूईटी को केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य भाग लेने वाले संस्थानों में प्रवेश के लिए शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य छात्रों को एक ही आवेदन प्रक्रिया और एक ही परीक्षा के माध्यम से कई विश्वविद्यालयों में प्रवेश का अवसर देना है।
देश की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा बनी सीयूईटी
रिपोर्ट के अनुसार, सीयूईटी शुरू होने के केवल दो वर्षों के भीतर ही भारत की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा बन गई है। वर्ष 2025 में इस परीक्षा के लिए 13,54,699 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था।
परीक्षा पैटर्न में किए गए बदलाव
समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीयूईटी (UG) के पहले तीन संस्करणों के अनुभव के आधार पर परीक्षा की संरचना में कुछ सुधार किए गए हैं।
सीयूईटी (UG) 2025 में कुल 37 विषयों की पेशकश की गई थी। साथ ही, वर्ष 2025 में परीक्षा परिणाम वर्ष 2024 की तुलना में तीन सप्ताह से अधिक पहले घोषित किए गए थे।
क्या बदल सकता है आगे?
फिलहाल समिति ने केवल समीक्षा और चर्चा की सिफारिश की है। रिपोर्ट में सीयूईटी को समाप्त करने या उसकी मौजूदा व्यवस्था में तत्काल बदलाव की कोई सिफारिश नहीं की गई है। हालांकि, समिति की टिप्पणियों के बाद भविष्य में परीक्षा पैटर्न, प्रश्नों की गुणवत्ता और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर नई चर्चाएं तेज हो सकती हैं।