एनटीए ने कहा था कि इसे पेपर लीक नहीं माना जा सकता
सूत्रों के मुताबिक, यह सवाल उस बैठक के बाद उठाया गया है जिसमें पिछले सप्ताह NTA के अधिकारियों ने संसदीय समिति के सामने अपना पक्ष रखा था। अधिकारियों ने दावा किया था कि NTA के सिस्टम से किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। उनका कहना था कि कुछ प्रश्न तथाकथित 'गेस पेपर' के जरिए पहले से प्रसारित हो रहे थे, लेकिन इसे पेपर लीक नहीं माना जा सकता।
एनटीए और सीबीएसई से मांगा लिखित जवाब
कांग्रेस सांसद दिग्विज सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति इस पूरे मामले की जांच कर रही है। समिति ने NTA और CBSE दोनों से लिखित जवाब मांगे हैं।
समिति ने एनटीए से यह भी पूछा है कि क्या उसने NEET UG 2024 में कथित अनियमितताओं को लेकर CBI जांच से अलग कोई स्वतंत्र जांच कराई थी। इसके अलावा पिछले तीन वर्षों में एजेंसी के कर्मचारियों की संख्या, 2022 के बाद की गई नई भर्तियों और उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई वार्षिक रिपोर्ट की जानकारी भी मांगी गई है।
राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर भी मांगा जवाब
समिति ने NTA से पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर भी विस्तृत जानकारी देने को कहा है। राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, NTA की कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए 101 सिफारिशें दी थीं। संसदीय समिति ने प्रत्येक सिफारिश पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।
सीबीएसई से भी मांगे गए जवाब
दूसरी ओर, CBSE से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर कई तकनीकी और प्रशासनिक सवाल पूछे गए हैं। समिति जानना चाहती है कि OSM सिस्टम के लिए जारी विभिन्न टेंडर दस्तावेजों (RFP) में क्या बदलाव किए गए और इन बदलावों के पीछे क्या कारण थे।
सूत्रों के अनुसार, समिति ने यह भी पूछा है कि OSM का ठेका देने से पहले COEMPT EduTeck की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी या नहीं। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि क्या CBSE को इस बात की जानकारी थी कि कंपनी या उसके निदेशकों का संबंध पहले Globarena Technologies से रहा है। इस कंपनी का नाम 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परिणाम विवाद की जांच में सामने आया था।
सीबीएसई से पूछा शर्तें क्यों हटाई गई?
संसदीय समिति ने यह भी सवाल उठाया है कि OSM अनुबंध के लिए जारी तीसरे RFP में खराब प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखने वाली कंपनियों को अयोग्य ठहराने वाली शर्त क्यों हटाई गई। इसी तरह पहले ब्लैकलिस्ट हो चुकी कंपनियों को बाहर रखने वाले प्रावधान में बदलाव क्यों किया गया और न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर की शर्त क्यों रखी गई।
समिति ने डेटा सेंटर, स्कैनिंग प्रक्रिया और तकनीकी मानकों से जुड़े बदलावों पर भी जवाब मांगा है। इनमें रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता हटाने, उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग से जुड़ी शर्तों में बदलाव, न्यूनतम स्कैनिंग रिजॉल्यूशन को 300 DPI से घटाकर 200 DPI करने और बड़े पैमाने की परियोजनाओं का अनुभव रखने से संबंधित पात्रता मानदंडों में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, समिति ने इससे पहले फरवरी, मई और अगस्त 2025 में जारी OSM टेंडर से जुड़े दस्तावेज भी मांगे थे, लेकिन अभी तक CBSE ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया है। इसके अलावा OSM ड्राई रन के दौरान नियुक्त पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।
8 और 10 जून तक देना होगा जवाब
समिति ने CBSE को 8 जून तक और NTA को 10 जून तक अपने लिखित जवाब जमा करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल दोनों संस्थानों की ओर से इन सवालों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।