आगे की कार्रवाई पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग करेगा फैसला
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने जानकारी दी कि डॉक्टरों की टीमों ने पांच शहरों में स्थित 12 निजी मेडिकल कॉलेजों का औचक निरीक्षण किया। कथित तौर पर ये संस्थान मेडिकल शिक्षा के लिए निर्धारित न्यूनतम मानक आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहे थे। इसलिए इनमें से एक को बंद कर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय की ओर से बाकी मेडिकल कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। निरीक्षण में मिली खामियों और शिकायतों के संबंध में कॉलेजों के खिलाफ आगे की कार्रवाई राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) तय करेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया ने की निगरानी
सूत्रों ने बताया कि पूरे मामले को लेकर इन औचक निरीक्षणों की निगरानी स्वयं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने की। स्वास्थ्य मंत्री ने एनएमसी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक कोर टीम बनाई थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि औचक निरीक्षण की गोपनीयता बनी रहे और मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाए। इतना ही नहीं, जांच टीम के सदस्यों को भी संबंधित कॉलेज के बारे में पूर्व सूचना नहीं दी गई बल्कि सूचना मिलने के दिन ही औचक निरीक्षण को कहा गया था। मंत्रालय चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता के साथ समझौता को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।
कोरोनाकाल में ऑनलाइन निरीक्षण से दी गई थी मान्यता
देश भर में 650 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के कालखंड में कुछ नए कॉलेजों को स्वीकृति और मान्यता देने की औपचारिकता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई थी। ऐसे संस्थानों में से कुछ के खिलाफ नियमों का पालन न होने और मानक पूरे नहीं करने को लेकर मंत्रालय को लगातार शिकायतें मिलीं। इसके बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तीन से छह डॉक्टरों की टीमों का गठन किया था। निरीक्षण के दौरान कई कमियां जैसे मेडिकल कॉलेज चलाने के लिए जरूरत से कम मरीज, कागज पर दिखाए गए संकायों की संख्या से मेल नहीं खाने और ढांचागत खामियां पाई गईं।