फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ओडिशा के 19 ऐसे गरीब बच्चों ने निकाला नीट जिनका परिवार बेचता है सब्जी, मछली और इडली-वड़ा 

Sat, 17 Oct 2020 05:39 PM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
जिंदगी फाउंडेशन के 19 बच्चों ने निकाला नीट - फोटो : ANI
विज्ञापन

मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होनी वाली नीट परीक्षा का रिजल्ट जारी हो चुका है। इस साल नीट परीक्षा में ओडिशा के रहने वाले शोएब आफताब ने ऑल इंडिया टॉप किया है। जबकि, दूसरा स्थान  आकांक्षा सिंह का है। वहीं, ओडिशा के ही 19 ऐसे गरीब बच्चों ने भी नीट परीक्षा में सफलता पाई है, जिनका परिवार आजीविका के लिए मजदूरी करता है, सब्जी व इडली-वड़ा बेचता है। ये सभी छात्र समाज के ऐसे तबके से हैं, जो बेहद गरीब व वंचित है। इन्होंने अपनी मेहतन और कड़े संघर्ष की बदौलत इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता पाई है।

विज्ञापन


इसे भी पढ़ें-नीट परीक्षा में टॉप करने वाले शोएब की कहानी, जो बचपन से ही बनना चाहते थे डॉक्टर

ओडिशा स्थित एक चैरिटेबल ट्रस्ट ने इस सभी छात्रों की पढ़ाई में मदद की। जिसे शिक्षाविद अजय बहादुर चलाते हैं।  यह ट्रस्ट ओडिशा से प्रतिभाशाली वंचित छात्रों का चयन करता है और उनकी कोचिंग का खर्चा उठाता है। इस ट्रस्ट का मकसद समाज के वंचित तबके के छात्रों के डॉक्टर बनने के ख्वाब को पूरा करना है। पैसों के अभाव से अजय बहादुर का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया था, जिसके बाद उन्होंने समाज के वंचित तबके के बच्चों के लिए इस तरह के ट्रस्ट की नींव रखी। उनका कहना है कि इस साल जिंदगी फाउंडेशन के 19 छात्रों ने नीट परीक्षा में सफलता पाकर इतिहास रचा है।
विज्ञापन


जिंदगी फाउंडेशन के संस्थापक अजय बहादुर सिंह ने कहा, मेरे पिता बीमार थे और हम उनके इलाज के लिए जरूरी दवाओं का खर्च नहीं उठा सकते थे, इसलिए मैं अजीबोगरीब काम करता था और अपनी मेडिकल पढ़ाई नहीं कर सका। अब मैं अन्य राज्यों के छात्रों को भी इस फाउंडेशन में जोड़ने की कोशिश करूंगा। 
विज्ञापन

 

इसे भी पढ़ें-जानिए NEET टॉपर आकांक्षा सिंह की कहानी, जो पहले करना चाहती थीं सिविस सर्विसेज की तैयारी


नीट में सफलता पाने वाले इन छात्रों में खिरोदिनी साहू भी शामिल हैं, जिनके पिता खेत में मजदूरी करते थे और लॉकडाउन के दौरान जिनकी नौकरी चले गई। खिरोदिनी ने नीट में 2,594 रैंक हासिल की है। इसी तरह, सब्जी बेचने वाले के बेटे सत्यजीत साहू ने नीट में 619 अंक हासिल किए हैं। नीट में सफलता पाने वाले सुभेंदु परिदा के पिता इडली वड़ा बेचते हैं। उन्होंने परीक्षा में 609 अंक हासिल किए हैं। निवेदिता पांडा ने नीट परीक्षा में 519 अंक हासिल किए हैं। उनके पिता की दुकान है। एक अन्य छात्र मंजित हैं, जिन्होंने नीट में सफलता पाई है, उनके पिता मछली बेचते हैं। स्मृति रंजन ने नीट परीक्षा में 536 अंक हासिल किए हैं। उनके पिता ट्रक ड्राइवर हैं। जिंदगी फाउंडेशन की शुरुआत 2017 में भुवनेश्वर में की गई थी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें