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10 अक्तूबर का इतिहास: टोक्यो ओलिंपिक से कैलाश सत्यार्थी को नोबेल के एलान तक..., जानें आज की प्रमुख घटनाएं

Sat, 10 Oct 2026 06:07 AM IST
शिवम तिवारी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

आज का  इतिहास: 10 अक्तूबर का इतिहास कई बड़ी घटनाओं का गवाह है। इसी दिन 1964 में टोक्यो ओलिंपिक शुरू हुए थे, जबकि 2014 में कैलाश सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई थी। जानिए बाह्य अंतरिक्ष संधि लागू होने, भारत की हॉकी में जीत और दुनिया की अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में, जिन्होंने इतिहास में अपनी खास जगह बनाई और आज भी याद की जाती हैं।
 
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10 अक्तूबर का इतिहास - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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10 अक्तूबर 1964 को जापान की राजधानी टोक्यो में ओलिंपिक खेलों का आगाज हुआ था। ये पहली बार था, जब एशिया में ओलिंपिक का आयोजन किया गया। करीब दो सप्ताह तक चले इन खेलों का समापन 24 अक्तूबर 1964 को हुआ।

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इससे पहले, 1940 के ओलिंपिक खेलों की मेजबानी टोक्यो को मिली थी। हालांकि, चीन के साथ युद्ध के चलते जापान को आयोजन का अधिकार छोड़ना पड़ा और इसकी मेजबानी हेलसिंकी को सौंप दी गई। बाद में द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1940 और 1944 के ओलिंपिक खेल भी आयोजित नहीं हो पाए।

लंबे इंतजार के बाद 1964 में जापान ने ओलिंपिक की मेजबानी की और एशिया में पहली बार इन खेलों का आयोजन हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध में हुई तबाही की याद को जीवित रखने के लिए हिरोशिमा में जन्मे योशिनोरी सकाई को ओलिंपिक मशाल जलाने की जिम्मेदारी दी गई। उनका जन्म 6 अगस्त 1945 को हुआ था, जिस दिन हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया गया था।
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टोक्यो ओलिंपिक कई मायनों में खास रहे। ये पहले ओलिंपिक खेल थे, जिनका सैटेलाइट के जरिए अमेरिका और यूरोप में प्रसारण किया गया। वहीं, दक्षिण अफ्रीका को उसकी रंगभेदी नीतियों के कारण प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई थी।

ओलिंपिक की ओपनिंग सेरेमनी का दृश्य।

15 दिनों तक चले इन खेलों में 93 देशों के 5,151 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। कुल 20 खेलों में 163 इवेंट आयोजित किए गए। इन खेलों में पहली बार जूडो और वॉलीबॉल को शामिल किया गया था।

इन ओलिंपिक खेलों में सोवियत संघ 96 पदक जीतकर शीर्ष पर रहा। अमेरिका 90 पदकों के साथ दूसरे और जर्मनी 50 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत को केवल हॉकी में एक पदक मिला। हॉकी के फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराकर 1960 के रोम ओलिंपिक में मिली हार का बदला लिया।

2014: कैलाश सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार देने का ऐलान

10 अक्तूबर 2014 को भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा हुई थी। उन्हें यह पुरस्कार पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से दिया गया। सत्यार्थी को यह सम्मान बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल मजदूरी के खिलाफ उनके लंबे संघर्ष के लिए मिला। इस उपलब्धि ने उनके काम को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई और बाल शोषण के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने में मदद की।

कैलाश सत्यार्थी का जन्म 11 जनवरी 1954 को मध्य प्रदेश के विदिशा में हुआ था। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन करीब 26 साल की उम्र में अपना पेशा छोड़कर बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने का फैसला किया। उन्होंने बाल मजदूरी और बच्चों के शोषण के खिलाफ अभियान चलाए। उनके प्रयासों से हजारों बच्चों को शोषण और बंधुआ मजदूरी से बाहर निकालने में मदद मिली। वह बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित बचपन दिलाने के लिए लगातार सक्रिय रहे।

सत्यार्थी ने बाल मजदूरी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अभियान चलाया और ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर के अध्यक्ष के रूप में काम किया। बच्चों को शोषण से बचाने के लिए चलाए गए अभियानों के दौरान उन्हें कई बार हमलों का सामना करना पड़ा। साल 2004 में ग्रेट रोमन सर्कस से बाल कलाकारों को छुड़ाने के अभियान और 2011 में दिल्ली की एक कपड़ा फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान भी उन पर हमले हुए। इसके बावजूद उन्होंने बाल अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखा।

नोबेल शांति पुरस्कार मिलने से पहले भी कैलाश सत्यार्थी को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके थे। इनमें 1994 का जर्मनी का द एयकनर इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड, 1995 का अमेरिका का रॉबर्ट एफ. कैनेडी ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड, 2007 का मेडल ऑफ इटेलियन सीनेट और 2009 का डिफेंडर्स ऑफ डेमोक्रेसी अवॉर्ड शामिल हैं। इन सम्मानों ने बच्चों के अधिकारों और बाल मजदूरी के खिलाफ उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी।

1967: बाह्य अंतरिक्ष संधि हुई लागू

10 अक्तूबर 1967 को बाह्य अंतरिक्ष संधि यानी आउटर स्पेस ट्रीटी प्रभावी हुई थी। इस संधि पर 27 जनवरी 1967 को अमेरिका, सोवियत संघ और ब्रिटेन ने हस्ताक्षर किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य बाहरी अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों की तैनाती पर रोक लगाना और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करना था। इस समझौते को अंतरिक्ष के सैन्य इस्तेमाल को सीमित करने और विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जाता है।

इससे पहले दिसंबर 1966 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस संधि को मंजूरी दी थी। इसके नियमों के मुताबिक, कोई भी देश बाहरी अंतरिक्ष, चंद्रमा या अन्य खगोलीय पिंडों पर अपना राष्ट्रीय स्वामित्व नहीं जता सकता। सभी देशों को अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान करने की स्वतंत्रता दी गई है। संधि में चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों पर सैन्य ठिकाने बनाने तथा सैन्य गतिविधियां संचालित करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष को सभी देशों के हित में शांतिपूर्ण क्षेत्र बनाए रखना है।

10 अक्तूबर की अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं

  • 2015: तुर्की की राजधानी अंकारा में शांति रैली के दौरान बम धमाके हुए। इन विस्फोटों में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई और करीब 200 लोग घायल हुए।
  • 2010: मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह का मुंबई में निधन हो गया। अपनी सुरीली आवाज और गजलों के लिए उन्हें देश-दुनिया में पहचान मिली थी।
  • 2005: एंजेला मर्केल जर्मनी की पहली महिला चांसलर बनीं। उनका इस पद पर पहुंचना देश के राजनीतिक इतिहास की एक बड़ी घटना थी।
  • 1990: अमेरिका का अंतरिक्ष यान डिस्कवरी-11 अपना मिशन पूरा करने के बाद पृथ्वी पर वापस लौटा।
  • 1986: अल सल्वाडोर की राजधानी सैन साल्वाडोर में 7.5 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इस आपदा में करीब 1,500 लोगों की जान चली गई।
  • 1978: रोहिणी खादिलकर राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता जीतने वाली पहली महिला बनीं। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय शतरंज में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान दी।
  • 1970: प्रशांत महासागर में स्थित फिजी ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता हासिल की। इसके साथ ही वह एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
  • 1954: हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री रेखा का जन्म हुआ। उन्होंने अपने अभिनय से फिल्म जगत में खास मुकाम बनाया।
  • 1910: वाराणसी में मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में पहला अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना था।
  • 1893: फ्रांस की राजधानी पेरिस में पहली बार कार नंबर प्लेट का इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है। इससे वाहनों की पहचान और पंजीकरण की व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
  • 1865: अमेरिकी आविष्कारक जॉन वेस्ली हयात ने बिलियर्ड बॉल से संबंधित पेटेंट हासिल किया। उनके प्रयोगों ने बिलियर्ड बॉल बनाने की तकनीक के विकास में योगदान दिया।
  • 1846: ब्रिटिश खगोलशास्त्री विलियम लासेल ने नेपच्यून के सबसे बड़े प्राकृतिक उपग्रह ट्राइटन की खोज की। यह खोज सौरमंडल के अध्ययन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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