2022-23 से लगातार बढ़ हही शिक्षकों की संख्या
रिपोर्ट के अनुसार, "शिक्षकों की संख्या में यह वृद्धि छात्र-शिक्षक अनुपात सुधारने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय शिक्षक असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 2022-23 से यह संख्या लगातार बढ़ रही है। 2022-23 की तुलना में रिपोर्टिंग वर्ष में शिक्षकों की संख्या में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।"
छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार
छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) पर नजर डालें तो UDISE Plus के आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न शैक्षिक स्तरों पर PTR इस प्रकार है:
- प्राथमिक स्तर: 1:10
- तैयारी/प्रिपरेटरी स्तर: 1:13
- मध्यम स्तर: 1:17
- माध्यमिक स्तर: 1:21
ये अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) द्वारा सुझाए गए 1:30 के मानक की तुलना में काफी बेहतर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि, "सुधरे हुए PTR से शिक्षकों और छात्रों के बीच व्यक्तिगत ध्यान और मजबूत संवाद संभव होता है, जो सीखने के अनुभव और शैक्षणिक परिणामों को बेहतर बनाता है।"
स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई
साल 2024-25 में ड्रॉपआउट दर में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई है। प्रिपरेटरी स्तर पर यह 3.7 प्रतिशत से घटकर 2.3 प्रतिशत, मध्य स्तर पर 5.2 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 10.9 प्रतिशत से घटकर 8.2 प्रतिशत हो गई।
| स्तर |
पिछले वर्ष |
रिपोर्टिंग वर्ष |
| प्रारंभिक |
3.7% |
2.3% |
| मध्य |
5.2% |
3.5% |
| माध्यमिक |
10.9% |
8.2% |
रिपोर्ट में कहा गया है कि, "यह गिरावट छात्रों के स्कूल में बने रहने में सुधार और बच्चों को शिक्षा में जुड़े रखने के लिए उठाए गए कदमों की सफलता को दर्शाती है। सभी स्तरों पर लगातार कमी यह संकेत देती है कि स्कूल अब छात्रों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील और सहायक बन रहे हैं।"
छात्रों की स्कूल में बने रहने की दर भी सुधरी
छात्रों की स्कूल में बने रहने की दर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। 2024-25 में विभिन्न स्तरों पर रिटेंशन दर इस प्रकार रही:
- प्राथमिक स्तर: 98.0% से बढ़कर 98.9%
- प्रिपरेटरी स्तर: 85.4% से बढ़कर 92.4%
- मध्यम स्तर: 78.0% से बढ़कर 82.8%
- माध्यमिक स्तर: 45.6% से बढ़कर 47.2%
रिपोर्ट के अनुसार, "माध्यमिक स्तर पर विशेष रूप से छात्रों की रिटेंशन दर में सुधार का एक प्रमुख कारण अधिक स्कूलों में माध्यमिक शिक्षा की उपलब्धता है। इससे पहुंच बढ़ी और निरंतर नामांकन को प्रोत्साहन मिला। कुल मिलाकर, बढ़ती रिटेंशन दर शिक्षा प्रणाली में प्रगति का स्पष्ट संकेत है और लक्षित पहलों के प्रभाव को दर्शाती है।"
शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या घटी
आंकड़े यह भी बताते हैं कि शून्य नामांकन (Zero Enrolment) वाले स्कूलों और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में लगातार गिरावट आई है। विशेष रूप से, एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या पिछले साल की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम हुई, जबकि शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 38 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।