नीट यूजी जैसी परीक्षाओं पर रहेगा विशेष फोकस
एनटीए के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नीट (यूजी) सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कार्यरत परीक्षा अधिकारियों को बेहतर तरीके से तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
कार्यक्रम का मकसद परीक्षा केंद्रों पर एक समान मानक (Uniform Standards) स्थापित करना और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
चार मॉड्यूल में तैयार किया गया पूरा कोर्स
परीक्षा कर्मयोगी कार्यक्रम को चार अलग-अलग मॉड्यूल में विभाजित किया गया है, जो परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण को कवर करते हैं।
मॉड्यूल-1: परीक्षा अधिकारियों की भूमिका
इस मॉड्यूल में परीक्षा कर्मियों की जिम्मेदारियों और परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता तथा ईमानदारी बनाए रखने में उनकी भूमिका को समझाया गया है।
मॉड्यूल-2: परीक्षा से पहले की तैयारी
इस भाग में परीक्षा केंद्र की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के पालन से जुड़ी जानकारी दी गई है।
मॉड्यूल-3: परीक्षा दिवस संचालन
यह मॉड्यूल परीक्षा के दिन की पूरी प्रक्रिया को चार चरणों में समझाता है-
- परीक्षा शुरू होने से पहले
- परीक्षा प्रारंभ होने के समय
- परीक्षा के दौरान
- परीक्षा समाप्त होने के बाद
मॉड्यूल-4: क्विक रेफरेंस गाइड
इसमें परीक्षा संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देशों और जिम्मेदारियों का संक्षिप्त सार दिया गया है, जिससे अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर तुरंत मार्गदर्शन मिल सके।

iGOT प्लेटफॉर्म पर मिलेगी ऑनलाइन ट्रेनिंग
यह कोर्स iGOT कर्मयोगी भारत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। इसके जरिए परीक्षा कर्मी अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं-
| विशेषता |
विवरण |
| प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म |
iGOT Karmayogi Bharat |
| प्रशिक्षण मोड |
ऑनलाइन एवं स्व-गति (Self-Paced) |
| लक्षित प्रतिभागी |
सेंटर सुपरिंटेंडेंट, निरीक्षक एवं परीक्षा कर्मी |
| प्रमाणन |
मूल्यांकन आधारित सर्टिफिकेट |
| उद्देश्य |
सुरक्षित, निष्पक्ष और मानकीकृत परीक्षा संचालन |
परीक्षा केंद्रों पर बढ़ेगी जवाबदेही
एनटीए का मानना है कि बड़े पैमाने पर आयोजित राष्ट्रीय परीक्षाओं की सफलता काफी हद तक प्रशिक्षित परीक्षा कर्मियों पर निर्भर करती है। इस पहल के माध्यम से परीक्षा केंद्रों पर:
- प्रक्रियात्मक अनुपालन बेहतर होगा
- संचालन क्षमता बढ़ेगी
- जवाबदेही मजबूत होगी
- परीक्षा प्रक्रिया में एकरूपता सुनिश्चित की जा सकेगी