किसी भी परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन लागू नहीं किया गया
एजेंसी ने यह भी बताया कि CUET (PG) परीक्षा में सभी उम्मीदवारों का मूल्यांकन सीधे प्राप्त अंकों (एब्सोल्यूट मार्क्स) के आधार पर किया जाता है। किसी भी परीक्षा में स्कोर नॉर्मलाइजेशन लागू नहीं किया गया है, न मुख्य परीक्षा में और न ही पुनर्निर्धारित परीक्षा में।
NTA का कहना है कि पुनर्निर्धारित परीक्षाओं और मुख्य परीक्षाओं के बीच उम्मीदवारों की संख्या में बड़ा अंतर था, इसलिए सांख्यिकीय रूप से नॉर्मलाइजेशन की जरूरत भी नहीं पड़ती। सभी उम्मीदवारों को समान नियमों के तहत ही अंक दिए गए हैं।
उदाहरण के लिए, मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी में लगभग 16,000 उम्मीदवार उपस्थित हुए थे, जबकि पुनर्निर्धारित परीक्षा में लगभग 120 उम्मीदवार ही शामिल हुए। इसी तरह राजनीति विज्ञान में मुख्य परीक्षा में लगभग 26,000 उम्मीदवार थे, जबकि पुनर्निर्धारित परीक्षा में लगभग 100 उम्मीदवार थे। इतिहास विषय में लगभग 13,600 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में शामिल हुए, जबकि पुनर्निर्धारित परीक्षा में 80 से भी कम उम्मीदवार थे।
NTA ने स्पष्ट किया कि इतने बड़े अंतर वाले समूहों-जहां एक तरफ हजारों और दूसरी तरफ केवल कुछ सौ या उससे भी कम उम्मीदवार हों-के बीच सांख्यिकीय रूप से नॉर्मलाइजेशन करना उचित नहीं होता। इसलिए सभी उम्मीदवारों का मूल्यांकन सीधे उनके प्राप्त अंकों के आधार पर ही किया गया है।
सभी का मूल्यांकन सीधे अंकों पर आधारित
NTA ने कहा है कि छोटे और बड़े उम्मीदवारों के समूह की तुलना करके स्कोर को बराबर करना सही नहीं होता, इसलिए CUET PG 2026 में ऐसा कोई तरीका (नॉर्मलाइजेशन) नहीं अपनाया गया। पुनर्निर्धारित परीक्षा के लिए भी वही प्रश्नपत्र इस्तेमाल किए गए जो पहले से विशेषज्ञों द्वारा तय किए गए थे और जिनकी कठिनाई स्तर समान माना गया था।
एजेंसी के अनुसार, सभी छात्रों का मूल्यांकन सीधे उनके असली अंकों (एब्सोल्यूट मार्क्स) के आधार पर किया गया है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। NTA का कहना है कि परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया गया है, ताकि सभी उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार हो सके।