तनाव में होने पर 5-10 मिनट करते थे ध्यान
उन्होंने आगे कहा, "तनाव में होने पर मैं 5-10 मिनट ध्यान करता था। मुझे लगता है कि परिवार के सदस्य, चचेरे भाई-बहन और दोस्त तनाव के क्षणों में बहुत मददगार होते हैं।"
कोटा शहर ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शुभम के अनुसार, विशेष अध्ययन सामग्री, अनुभवी शिक्षक और प्रतिस्पर्धी छात्रों का समूह सिर्फ कोटा जैसे शहर में ही संभव है, कहीं और नहीं।
उन्होंने आगे कहा, “लक्ष्य हासिल करने के लिए हमारे अंदर एक दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन होनी चाहिए। मैंने हर चुनौती को प्रेरणा में बदल दिया। मेरा पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित था। अब मैं IIT बॉम्बे के कंप्यूटर विज्ञान शाखा से बीटेक करूंगा,” शुभम ने कहा। बेहद प्रसन्न शिव कुमार ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की सफलता की उम्मीद थी। उन्होंने पीटीआई को बताया, "चूंकि वह यहां इतने लंबे समय से तैयारी कर रहा था, इसलिए मुझे पता था कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा।"
कबीर छिल्लर: तनाव से दूर रहकर हासिल की ऑल इंडिया दूसरी रैंक
ऑल इंडिया दूसरी रैंक हासिल करने वाले कबीर छिल्लर सिर्फ एक अंक से टॉप स्थान से चूक गए। कबीर का कहना है कि उन्होंने कभी भी पढ़ाई या परीक्षा का तनाव नहीं लिया। उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बताया और कहा कि किसी भी विषय को समझने के लिए उन्हें उसे केवल एक बार ध्यान से पढ़ना पड़ता था। परीक्षा की तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा।
कबीर ने कहा, "मैं सोशल मीडिया का उपयोग कभी नहीं करता। मेरे पास व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम है, लेकिन केवल शिक्षकों और दोस्तों से विषय पर चर्चा के लिए जुड़ने के लिए"।
कबीर के पिता, मोहित छिल्लर, भी आईआईटी से पढ़े हुए हैं और सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि उनकी मां, प्रियंका छिल्लर एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं।
प्रियंका छिल्लर ने कहा, "जिस तरह से वह मेहनत करता था, उससे उम्मीद थी कि वह कुछ असाधारण करेगा।"