बारहवीं की परीक्षा को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बोर्ड परीक्षा को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई गुरुवार तक टाल दी गई है। वहीं मंगलवार को शिक्षा मंत्री की तबीयत खराब हो जाने की वजह से अंतिम फैसले की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की दाखिला प्रक्रिया भी अधर में है। परीक्षा को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण डीयू प्रशासन भी दाखिला प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दे पा रहा है। इस कारण छात्रों में भी काफी असमंजस है। उनके सामने बड़ा सवाल है कि कॉलेज में उनका दाखिला किस आधार पर होगा, कॉमन एंट्रेंस टेस्ट या पहले की तरह एंट्रेस टेस्ट हुआ तो उसका पैटर्न क्या होगा। यह भी तय नहीं है कि क्या प्रत्येक कोर्स के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षा होगी।
उम्मीद की जा रही थी कि मई में डीयू में दाखिले का शेड्यूल जारी हो जाएगा। लेकिन दाखिले की प्रक्रिया 12वीं के अंकों से जुड़ी होने के कारण अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। उम्मीद थी कि 1 जून को बारहवीं बोर्ड का फैसले आने के बाद डीयू द्वारा भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। किंतु शिक्षा मंत्री का स्वास्थ्य खराब होने की वजह से यह प्रक्रिया और आगे बढ़ गई है। बता दें डीयू में सीबीएसई समेत विभिन्न राज्य बोर्ड के विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। इन सब कारणों से विद्यार्थियों में तनाव काफी बढ़ता जा रहा है।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जिस तरह की स्थितियां बनी हैं, उनसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट से दाखिले मुश्किल लग रहे हैं। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि कॉमन एंट्रेस टेस्ट नहीं हुए तो पहले ही तरह ही दाखिला प्रक्रिया हो सकती है। इस बार भी बीते साल की तरह पहले ही दाखिला प्रक्रिया शुरू करने में देरी हो रही है। बीते साल भी कोरोना महामारी के कारण सीबीएसई के रिजल्ट जुलाई में घोषित हुए थे। इसके बाद ही दाखिला प्रक्रिया शुरू हुई थी। इस बार अब तक कुछ स्पष्ट नहीं है।