महाराष्ट्र के आदिवासी कल्याण विभाग ने कोरोनो वायरस के मद्देनजर प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली कक्षा में आदिवासी छात्रों के प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। मंत्री केसी पाडवी ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजना के तहत आदिवासी छात्रों को प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश मिलता है और बारहवीं कक्षा तक उनकी शिक्षा राज्य द्वारा वित्त पोषित होती है। लेकिन अभी पहली कक्षा में आदिवासी छात्रों के प्रवेश पर अस्थाई रोक लगा दी गई है।
आदिम जाति कल्याण मंत्री केसी पाडवी ने ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि कक्षा दो से लेकर 12 तक इस वक्त 50,269 आदिवासी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इस फैसले से उनको नुकसान नहीं होगा, क्योंकि उनकी शिक्षा जारी रहेगी। जिन आदिवासी छात्रों का कोरोना वायरस से पहले अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में दाखिला हो चुका है और जो पहले से ही पढ़ रहे हैं उनकी पढ़ाई जारी रहेगी। जिन विद्यार्थियों ने अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिले के लिए आवेदन कर रखा है उनको आदिवासी कल्याण विभाग के संबद्ध अंग्रेजी और अर्ध-अंग्रेजी स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस साल पहली कक्षा में प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में आदिवासी छात्रों के प्रवेश को रोकने का निर्णय अस्थायी है और इसे कोरोनो वायरस के मद्देनजर पैदा हुए आर्थिक हालात की वजह से लिया गया है। कोविड-19 की वजह से दशा सुधरने के बाद सरकार इस फैसले को संशोधित करेगी।