फिलहाल फिंगरप्रिंट से दर्ज होती है उपस्थिति
फिलहाल उपस्थिति के लिए फिंगरप्रिंट-आधारित आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) अपनाई जा रही है, जिसे बंद कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर फेस-आधारित आधार प्रमाणीकरण लागू किया जाएगा। उपस्थिति दर्ज करने की अनुमति केवल मोबाइल ऐप या दीवार पर लगे उपकरणों के माध्यम से होगी।
कॉलेजों को साझा करने होंगे जीपीएस कॉर्डिनेट्स
इस बदलाव को आसान बनाने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को अपने परिसर में उन स्थानों के जीपीएस निर्देशांक (Loction) साझा करने होंगे जहां फैकल्टी मोबाइल ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज करेंगे। यह जानकारी कॉलेज के डीन या प्रिंसिपल के हस्ताक्षर और मुहर सहित 20 अप्रैल 2025 तक एनएमसी (NMC) को भेजनी होगी।
यह विवरण ईमेल के माध्यम से support.aebas@nmc.org.in पर भेजा जाए, जिसमें विषय पंक्ति हो - "Face AEBAS कॉलेज का पूरा नाम> कॉलेज का शहर>।" इसके साथ ही, कॉलेज के नोडल अधिकारी का संपर्क विवरण भी जरूर शामिल किया जाए।
एनएमसी के आधिकारिक नोटिस के अनुसार, "कॉलेज में दिए गए स्थान के 100 मीटर के दायरे में ही उपस्थिति दर्ज की जा सकेगी। कॉलेजों को उन स्थानों के जीपीएस निर्देशांक (फॉर्मेट अनुलग्नक-I में) साझा करने होंगे, जहां वे मोबाइल ऐप के माध्यम से हाजिरी की सुविधा देना चाहते हैं।"
24 अप्रैल से एप एक्टिव होगा
जैसे ही यह जानकारी एनएमसी को भेज दी जाती है, संकाय सदस्यों को अपने मोबाइल फोन में फेस-आधारित आधार प्रमाणीकरण ऐप इंस्टॉल करना होगा। यह ऐप एंड्रॉयड प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर, दोनों पर उपलब्ध है। यह एप 24 अप्रैल 2025 से एक्टिव हो जाएगा। यदि किसी कॉलेज को तकनीकी समस्या आती है, तो उसे 30 अप्रैल 2025 से पहले एनएमसी की तकनीकी टीम को सूचित करना होगा।
1 मई 2025 से फिंगरप्रिंट आधारित आधार प्रमाणीकरण पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और केवल फेस बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की अनुमति होगी।
सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के डीन या प्रिंसिपलों से अपेक्षा की जाती है कि वे सुनिश्चित करें कि उनके सभी फैकल्टी मेंबर्स के मोबाइल में यह ऐप सही तरीके से इंस्टॉल और एक्टिवेट किया गया हो।